मोदी-बादल मुलाकात: क्या पंजाब की सियासत बदलेगी?

सुखबीर बादल और पीएम मोदी की अहम मुलाकात

शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात संसद भवन के अंदर हुई। सुखबीर बादल सुबह ही दिल्ली पहुंचे थे। दोनों नेताओं की इस मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है।

पंजाब चुनाव से पहले गठबंधन की चर्चा तेज

पंजाब विधानसभा चुनाव में अब करीब चार महीने बचे हैं। ऐसे में यह मुलाकात चुनावी समीकरणों को बदल सकती है। सूत्रों के मुताबिक, अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत तेज हो गई है। दोनों दलों ने पहले किसान आंदोलन के कारण रिश्ते तोड़ लिए थे। अब वापसी की कोशिशें जोरों पर हैं। इस मुलाकात को भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल के नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत माना जा रहा है।

किसान आंदोलन के बाद पहली बड़ी राजनीतिक सक्रियता

किसान आंदोलन के दौरान अकाली दल ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था। पिछले कुछ महीनों से दोनों पार्टियों के नेता एक-दूसरे पर निशाना साध रहे थे। लेकिन अब अचानक हुई इस मुलाकात ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार ने किसानों की कई मांगें मान ली हैं। इससे अकाली दल का रुख नरम हुआ है। पंजाब की जनता इस गठबंधन पर बारीकी से नजर रख रही है।

चुनावी रणनीति और सीटों का गणित

पंजाब में 117 विधानसभा सीटें हैं। पिछले चुनाव में अकाली दल और भाजपा ने साथ मिलकर लड़ा था। अब फिर से सीटों के बंटवारे पर चर्चा हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस और आप को कड़ी टक्कर देने के लिए दोनों दलों का साथ आना जरूरी है। शिरोमणि अकाली दल की जड़ें ग्रामीण इलाकों में मजबूत हैं। वहीं भाजपा का शहरी क्षेत्रों में अच्छा खासा प्रभाव है। दोनों का साथ चुनावी फायदा दिला सकता है।

मुलाकात के बाद सियासी हलचल तेज

इस मुलाकात के बाद पंजाब की सियासत गर्म हो गई है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है। दोनों दल सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर हमलावर हैं। सुखबीर बादल ने अभी तक इस मुलाकात के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि जल्द ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी। खबर को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं। अगले कुछ दिनों में पंजाब की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि यह मुलाकात आगामी चुनावों का रुख तय करने वाली साबित हो सकती है।
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