परम्पराः गांवों में घरों के दरवाजे पर चौकीदारों ने चिपकायें नाग चित्र

हमीरपुर, 17 अगस्त । उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में नागपंचमी के दिन गांवों में घर-घर चौकीदार दरवाजे पर नाग देवता के चित्र चिपकाकर इस पर्व को धूमधाम से मनाये जाने की परम्परा कायम किये है। सोमवार को बीस सालों के बाद नागपंचमी पर्व का अद्भुत संयोग पडऩे पर चौकीदारों ने सभी के घरों के मुख्य दरवाजों पर नाग चित्र चिपकाये। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं ने भैंस के गोबर से नाग की आकृति बनाकर विधि विधान से पूजा अर्चना की। इधर नाग देवता के मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता पूजा और दर्शन के लिये लगा हुआ है। ग्रामीण इलाकों में लोगों ने घरों के मुख्य दरवाजों पर भैंस के गोबर से नाग की आकृति बनाकर पूजन अर्चन किया।

पंडित मिथलेश द्विवेदी, समाजसेवी गणेश विद्यार्थी व दिनेश दुबे ने बताया कि सावन का तीसरा सोमवार अद्भुत संयोग लेकर आया है। वर्ष 1999 में नागपंचमी पर्व सोमवार को पड़ा था। बीस सालों के बाद इस साल नागपंचमी सोमवार को पडऩे से श्रद्धालुओं का विशेष पूजा के लिये उत्साह देखा जा रहा है। जिले के सुमेरपुर, मौदहा, गोहांड, राठ , कुरारा और सरीला सहित समूचे क्षेत्र में नागपंचमी की धूम मची हुयी है। बुन्देलखण्ड के हमीरपुर जिले में हजारों साल पुरानी परम्परा के अनुसार घरों के मुख्य दरवाजों पर भैंस के गोबर से नागों की आकृति बनाकर घी गुड़ से पूजन किया गया। शाम को इन्हीं आकृतियों में गाय का दूध छिड़कर परम्परा का निर्वहन किया जाएगा।

बुन्देली परम्परा के मुताबिक गांवों के चौकीदारों ने घर-घर जाकर नाग चित्र चिपकाये है। इन्होंने गांवों के मठ मंदिरों में भी नाग चित्र भेंट किये है। इस मौके पर तमाम जगहों पर आल्हा गायन और दंगल आदि के कार्यक्रम भी किये गये है। शाम को महिलायें सावन गीत एवं मंगल गीत गाकर भुजरियां बोने के लिये मिट्टी लेने गयी है। इस तरह से पूरे क्षेत्र में नागपंचमी का पर्व श्रद्धा, उत्साह के साथ परम्परागत ढंग से मनाया जा रहा है। नागपंचमी के दिन घर-घर में बोयी गयी भुजरियां (कजली) रक्षाबंधन को सरोवरों में विसर्जित की जायेगी। इसके लिये तैयारियां भी शुरू हो गयी है। इधर जिले के कुरारा क्षेत्र के टोडरपुर गांव में स्थित नाग देवता के मंदिर में हजारों की संख्या में लोगों ने आकर नागपंचमी की पूजा की और बेशकीमती पत्थर से बने नाग देवता पर दूध अर्पित किया। यहां दो दिवसीय मेले का भी आयोजन किया गया है।

गांव के पंडित मिथलेश द्विवेदी ने बताया कि नाग देवता के मंदिर में पूजा करने के लिये जालौन, फतेहपुर, कानपुर देहात व अन्य आसपास के इलाकों से भारी तादात में श्रद्धालु आये है। मंदिर प्रांगण में भजन कीर्तन का कार्यक्रम भी किया गया है। बता दे कि इस गांव में 22 साल पहले इसलिये नाग देवता का मंदिर बनाया गया था क्योंकि यहां सांपों का आतंक था। मंदिर बनने के बाद आज तक इस गांव में सर्पदंश से एक भी मौत नहीं हुयी है। इधर मुस्करा क्षेत्र के अलरा गांव में भी नाग देवता के मंदिर में लोगों ने पूजा अर्चना की है। यहां मेले का आयोजन किया गया है।