कांग्रेस का बड़ा फेरबदल: पंजाब प्रभारी बने सचिन पायलट
कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में संगठन को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को पंजाब का नया प्रभारी नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पंजाब में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक है और पार्टी आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही है। सचिन पायलट को राजस्थान में पार्टी की जीत का श्रेय दिया जाता है, जहां उन्होंने 2018 में गुटों को एकजुट कर कांग्रेस को बहुमत दिलाया था। हाईकमान को उम्मीद है कि वह पंजाब में भी यही करिश्मा दोहरा पाएंगे और पार्टी की किस्मत बदल पाएंगे।
रंधावा और पायलट का अनोखा संयोग
सचिन पायलट की नियुक्ति के साथ ही कांग्रेस में एक दिलचस्प संयोग बना है। सुखजिंदर रंधावा को राजस्थान कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है, जबकि पायलट पंजाब के प्रभारी होंगे। इस तरह दोनों नेता एक-दूसरे के बॉस बन गए हैं। यानी पायलट पंजाब में रंधावा के बॉस होंगे, तो वहीं रंधावा राजस्थान में पायलट के बॉस होंगे। यह स्थिति दोनों राज्यों के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी ने भी राजस्थान के नेता डॉ. सतीश पूनिया को पंजाब प्रभारी बनाया है। ऐसे में अब दोनों बड़ी पार्टियों के पंजाब प्रभारी राजस्थान से ही आए हैं। यह संयोग राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बघेल की छुट्टी करने की नौबत क्यों आई?
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी के बाद यह फेरबदल हुआ है। पूर्व प्रभारी भूपेश बघेल पर आरोप था कि वह मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों की अनदेखी कर रहे थे। चन्नी गुट ने लगातार बघेल के कामकाज पर सवाल उठाए। कई कार्यक्रमों में दोनों खेमों के बीच जमकर हंगामा हुआ। यहां तक कि बघेल के खिलाफ ‘गो बैक’ के पोस्टर भी लगाए गए। पटियाला और लुधियाना में तो नौबत हाथापाई तक पहुंच गई थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इतिहास में पहली बार किसी प्रदेश प्रभारी के खिलाफ इस तरह का विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति को देखते हुए राहुल गांधी की टीम ने 3 सितंबर को सभी पक्षों के साथ बैठक की और आखिरकार बघेल को हटाकर पायलट को जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया।
सचिन पायलट के सामने चुनौतियों का पहाड़
सचिन पायलट के लिए पंजाब की जिम्मेदारी आसान नहीं होगी। 2027 का चुनाव अब केवल कुछ ही महीने दूर है, ऐसे में समय बहुत कम है। उन्हें सबसे पहले कांग्रेस के बिखरे हुए गुटों को एकजुट करना होगा। चन्नी गुट और राजा वड़िंग गुट के बीच समन्वय बैठाना उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी। टिकट बंटवारे में भी उन्हें संतुलन बनाना होगा, ताकि किसी भी वर्ग में असंतोष न फैले। साथ ही उन्हें भाजपा और आम आदमी पार्टी की चुनौती का सामना भी करना होगा। सूत्रों के अनुसार, पार्टी को उम्मीद है कि पायलट की कार्यशैली से पंजाब में कांग्रेस को नई दिशा मिलेगी, लेकिन उनका काम कठिन जरूर है।
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