DA रुका, काम ठप, MLA पेंशन 60% बढ़ी; मंत्री ने कहा- एक्शन होगा

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों का बड़ा विरोध प्रदर्शन

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच तनाव अपने चरम पर है। पंजाब साझा मुलाजिम मंच के आह्वान पर क्लेरिकल स्टाफ ने मंगलवार को पंजाब और चंडीगढ़ के सरकारी दफ्तरों में सामूहिक अवकाश पर जाकर विरोध जताया। हालांकि, कई सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद मिले और कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा। यह विरोध प्रदर्शन कर्मचारियों द्वारा पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने सहित कुल 14 मांगों को लेकर किया जा रहा है। कर्मचारी महंगाई भत्ते (डीए) की बकाया किश्तें जारी करने और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की भी मांग कर रहे हैं।

मोहनजीत हमले के विरोध में भूख हड़ताल

विरोध प्रदर्शन के तहत कर्मचारी चंडीगढ़-मोहाली में हुए मोहनजीत पर हमले के विरोध में काले कपड़े पहनकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। यह प्रतीकात्मक विरोध कर्मचारी संगठनों की एकजुटता और गुस्से को दर्शाता है। संघों का कहना है कि उनकी मांगें जायज हैं और सरकार को जल्द से जल्द बातचीत करनी चाहिए। इस दौरान कई जिलों में कर्मचारी नेताओं ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सरकार की चेतावनी और कर्मचारियों से बातचीत की अपील

हड़ताल से पहले पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि हड़ताल के कारण आम जनता को परेशानी होती है तो सरकार कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करेगी। मंत्री ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे हड़ताल का रास्ता छोड़कर बातचीत के जरिए मुद्दों का समाधान करें। अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि सरकार कर्मचारियों के बकाये से इनकार नहीं कर रही है और भुगतान के लिए एक योजनाबद्ध ढांचा पहले ही तैयार किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए 85 हजार कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 42% से बढ़ाकर 60% कर दिया गया है। सरकार बाकी कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान वेतन देने का भी प्रस्ताव विचार कर रही है।

बिजली संकट से पंजाब में ब्लैकआउट का खतरा

इस बीच पंजाब में बिजली संकट का एक और गंभीर मुद्दा सामने आया है। राज्य के निजी थर्मल पावर प्लांटों में सिर्फ दो दिन का कोयला बचा है। पंजाब बिजली मंत्री तरुणप्रीत सोंध के अनुसार अगर कोयले की आपूर्ति तुरंत नहीं होती है तो प्लांटों में बिजली उत्पादन ठप हो जाएगा। इंजीनियर्स एसोसिएशन का दावा है कि इससे राज्य को करीब 7800 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो आने वाले दिनों में आम लोगों को लंबे और बार-बार बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। इस बिजली संकट के बीच सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल से जनता की परेशानी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। कुल मिलाकर पंजाब की ताजा खबरें में सरकार के लिए चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। इस लेख में विरोध प्रदर्शन और बिजली संकट की प्रमुख खबरों की जानकारी दी गई है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत का अगला दौर तय करता है कि आंदोलन आगे बढ़ता है या थमता है।
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