डकैती साजिश मामले में BSF के 2 जवान बरी, गोंडर के साथी को 1 साल की सजा

मोहाली कोर्ट का बड़ा फैसला: BSF जवान बरी, गैंगस्टर को सजा

मोहाली की एक विशेष अदालत ने 2015 के हाई-प्रोफाइल डकैती मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने BSF के दो जवानों अनिल कुमार और प्रेम सिंह को डकैती की साजिश और अन्य आरोपों से बरी कर दिया। साथ ही गैंगस्टर गिरोह से जुड़े जतिंदर सिंह उर्फ जिंदी को अवैध हथियार रखने के जुर्म में दोषी ठहराया गया।

गैंगस्टर जिंदी को 1 साल की कठोर सजा

अदालत ने जतिंदर सिंह उर्फ जिंदी को आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास और 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं मामले के दो मुख्य आरोपी गुरजंट सिंह उर्फ भोलू और संदीप सिंह को अदालत पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है। ये दोनों लगातार कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे।

पुलिस डकैती की साजिश साबित नहीं कर पाई

अदालत ने माना कि 1 सितंबर 2015 को डकैती की साजिश रचने का कोई ठोस सबूत रिकॉर्ड पर नहीं है। पुलिस का दावा था कि आरोपी उस दिन हथियारों के साथ डकैती की योजना बना रहे थे। लेकिन उस दिन किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। आरोपी दिसंबर 2015 में पकड़े गए थे। अदालत ने पुलिस की इस थ्योरी को कमजोर माना।

पाकिस्तान से तस्करी के आरोप भी फेल

पुलिस ने BSF जवानों पर पाकिस्तान से हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया था। हालांकि अदालत में इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं हो सका। दोनों जवानों के कब्जे से कोई अवैध हथियार, गोला-बारूद या नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ। पुलिस कोई कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी पेश नहीं कर सकी, जिससे गिरोह से उनका संपर्क साबित होता। अदालत के सामने पुलिस की पूरी थ्योरी मुख्य रूप से सह-आरोपियों के बयानों पर टिकी थी, जिसकी स्वतंत्र सबूत से पुष्टि नहीं हुई।

क्या थी पुलिस की पूरी कहानी

1 सितंबर 2015 की शाम सीआईए स्टाफ मोहाली की टीम देशू माजरा के पास गश्त पर थी। पुलिस को सूचना मिली कि विक्की गोंडर समेत कई गैंगस्टर सहारनपुर से भारी मात्रा में हथियार लेकर आए हैं। वे मोहाली में KFC के पास मौजूद थे। पुलिस ने FIR दर्ज कर छापेमारी की, लेकिन उस दिन कोई आरोपी हाथ नहीं आया। बाद में 29 दिसंबर 2015 को पुलिस ने भोलू और संदीप को खरड़ से पकड़ा। उनके पास से पिस्तौल और कारतूस बरामद हुए। पूछताछ में आरोपियों ने BSF जवानों के नाम उछाले। पुलिस ने BSF से अनुमति लेकर दोनों जवानों को गिरफ्तार किया था। अब अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है।

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