परगट सिंह पंजाब कांग्रेस के प्रधान क्यों बने? जट्ट सिख से लेकर संगठनात्मक भूमिका तक जानें वजह

पंजाब कांग्रेस में बड़ा सियासी उलटफेर

पंजाब कांग्रेस में प्रदेश प्रधान की नियुक्ति को लेकर आखिरी वक्त पर बड़ा सियासी उलटफेर हुआ। सुबह तक पूर्व सांसद विजयइंदर सिंगला का नाम लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन हाईकमान ने ऐन वक्त पर अपना फैसला बदल दिया। पूर्व हॉकी कैप्टन और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को कमान सौंप दी गई। 2 अक्टूबर को सिंगला के समर्थक बधाई की तैयारी कर रहे थे। अचानक फैसला पलटने से सब हैरान रह गए।

वड़िंग-राहुल की मुलाकात का असर

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बदलाव में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की राहुल गांधी से मुलाकात अहम रही। वड़िंग ने सिंगला के नाम पर सीधा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सिंगला चन्नी खेमे से जुड़े हैं। अगर उन्हें प्रधान बनाया गया तो पूरी पार्टी पर चन्नी गुट का दबदबा हो जाएगा। इससे बाकी धड़े नाराज हो जाएंगे। राहुल गांधी ने इस तर्क को गंभीरता से लिया। वड़िंग का यह दांव सिंगला का खेल बिगाड़ने में सबसे बड़ा कारण बना।

जट्ट सिख चेहरे पर दांव की मजबूरी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सिंगला को प्रधान बनाने की सिफारिश की थी। पार्टी हिंदू चेहरे पर दांव लगाकर भाजपा को काउंटर करना चाहती थी। लेकिन वड़िंग ने साफ कहा कि पंजाब में जट्ट सिख मुखिया से ही जीत मिल सकती है। वरिष्ठ नेताओं ने भी फीडबैक दिया कि चुनाव से पहले हिंदू चेहरे को कमान देने से सिख वोट बैंक बिगड़ सकता है। पंजाब के सामाजिक ताने-बाने को देखते हुए पार्टी ने परगट सिंह पर दांव खेला।

चन्नी गुट से हाईकमान की रणनीतिक दूरी

2022 के विधानसभा चुनाव के बाद से हाईकमान चन्नी की कार्यशैली से सहज नहीं रहा। सिंगला को चन्नी गुट से जोड़कर देखा जाता रहा। वड़िंग ने राहुल को बताया कि चन्नी गुट के नेता को प्रधान बनाने से संगठन में नाराजगी बढ़ेगी। राहुल वड़िंग को नाराज नहीं करना चाहते थे। उनके कहने पर ही वड़िंग ने इस्तीफा दिया था। इसलिए सिंगला को प्रधानगी नहीं सौंपी गई।

2027 की रणनीति: 2017 का फॉर्मूला

जट्ट सिख समुदाय पंजाब की राजनीति को डोमिनेट करता है। 2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने 77 सीटें जीतीं। 2022 में चन्नी को सीएम फेस बनाया, तो पार्टी सिर्फ 18 सीटों पर सिमट गई। 2024 लोकसभा चुनाव में वड़िंग की अगुवाई में पार्टी ने 13 में से 7 सीटें जीतीं। ऐसे में कांग्रेस फिर 2017 के फॉर्मूले पर 2027 का चुनाव लड़ने जा रही है।

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