रितु ने एक अक्टूबर 2026 को बैंकॉक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ऑनलाइन
माध्यम से अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। इस शोध में उन्होंने प्राचीन भारतीय ग्रंथों
में वर्णित दंड और दंडनीति की अवधारणाओं को केंद्र में रखते हुए मनुस्मृति, शुक्रनीति
और कौटिल्य के अर्थशास्त्र का तुलनात्मक अध्ययन किया। इसके माध्यम से उन्होंने भारतीय
ज्ञान परंपरा में शासन, अनुशासन और नीतिगत व्यवस्था से जुड़े सिद्धांतों को शोध के
माध्यम से प्रस्तुत किया। इससे पहले जून 2026 में भी रितु के शोध पत्र का ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड
यूनिवर्सिटी में चयन हुआ था। उनका यह शोध कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित प्रबंधन
सिद्धांतों और आधुनिक कॉरपोरेट गवर्नेंस में उनकी प्रासंगिकता पर आधारित है। इसमें
प्राचीन भारतीय प्रबंधन दृष्टिकोण और वर्तमान कारोबारी एवं संस्थागत व्यवस्था के बीच
रितु के शोध की खास बात यह है कि उन्होंने संस्कृत के प्राचीन ग्रंथों को केवल
ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण तक सीमित न रखते हुए उनमें मौजूद नीतिगत, प्रशासनिक
और प्रबंधन संबंधी विचारों को आधुनिक संदर्भों में समझने का प्रयास किया है। अंतरराष्ट्रीय
मंचों पर उनके शोध पत्रों का चयन भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य की वैश्विक
अकादमिक उपयोगिता को भी सामने लाता है। रितु की इस दोहरी उपलब्धि से पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के संस्कृत विभाग में
खुशी का माहौल है। विभाग की चेयरपर्सन डॉ. सुनीता शर्मा और अन्य शिक्षकों ने उन्हें
बधाई देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा
का प्रतिनिधित्व करना पूरे विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। रितु के पिता ज्ञानीराम और माता गीता रानी बेटी की इस उपलब्धि से बेहद उत्साहित
हैं। परिवार में खुशी का माहौल है। रितु ने अपनी सफलता का श्रेय अपने शोध निर्देशक,
माता-पिता और पंजाब यूनिवर्सिटी के संस्कृत विभाग से मिले मार्गदर्शन एवं सहयोग को
दिया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार बल्कि हिसार को भी गौरवान्वित किया है।