उत्तर भारत में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही गर्म कपड़ों और बेडिंग उत्पादों की मांग बढ़ने लगी है, लेकिन इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक रुई की रजाइयों की बिक्री में इस सीजन 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत हल्के वजन वाले कंबल क्विल्ट और माइक्रोफाइबर ब्लैंकेट तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
स्थानीय दुकानदारों और थोक व्यापारियों के अनुसार, रुई की रजाइयों की मांग पिछले कुछ वर्षों से लगातार कम हो रही है, लेकिन इस बार गिरावट ज्यादा दिखाई दे रही है। इसका मुख्य कारण है हल्के आसानी से धोए जाने वाले और मॉडर्न डिज़ाइन वाले कंबलों की बढ़ती लोकप्रियता। माइक्रोफाइबर और फ्लीस कंबल न केवल हल्के होते हैं बल्कि इनमें अच्छी गर्माहट भी मिलती है, जिससे उपभोक्ता इनकी ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि रुई की रजाइयों के रखरखाव में काफी मेहनत लगती है। उन्हें समय-समय पर धूप दिखाना, बदलवाना और सहेजकर रखना पड़ता है, जबकि माइक्रोफाइबर कंबल सीधे मशीन में धुले जा सकते हैं और लंबे समय तक टिकते हैं। यही कारण है कि युवा पीढ़ी और नए परिवार पारंपरिक रजाइयों की जगह मॉडर्न बेडिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ऑनलाइन मार्केट ने भी इस ट्रेंड को और मजबूत किया है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर कंबलों की विविधता, ऑफर और त्वरित डिलीवरी ने उनकी बिक्री में जबरदस्त उछाल दिया है। कई ब्रांड तो अल्ट्रा-लाइट, डबल-लेयर और थर्मल टेक्नोलॉजी वाले कंबल भी पेश कर रहे हैं, जिससे यह सेगमेंट और मजबूत हुआ है।
दूसरी ओर, रजाई बनाने वाले कारीगर और छोटे व्यापारी इस गिरावट से चिंतित हैं। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच कच्चा माल महंगा हो गया है, जबकि बिक्री घटने से बाजार प्रभावित हो रहा है।