प्रति कुलपति सुधीर अवस्थी ने सर्वप्रथम देश के प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि जिनके नेतृत्व में देश का आध्यात्मिक और योगानुकूल वातावरण विनिर्मित हुआ है। साथ ही विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने जहां एक ओर नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, वही दूसरी ओर सनातन संस्कृति से जुड़े हुए विषय भी अपनी प्रतिष्ठा प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का वातावरण योग और ध्यान से परिपूर्ण हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बाद यह द्वितीय बड़ी उपलब्धि है, जहां हम सभी लोग सामूहिक रूप से ’अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिवस’ मना कर ध्यान और योग के महत्व से अवगत और लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ध्यान की परम्परा सभी सम्प्रदायों में पायी जाती है। बौद्ध और जैन दर्शन में यह ध्यान की परम्परा बहुत ही प्रचलित और जनसामान्य के लिए उपलब्ध है। उन्होंने बौद्ध की ’विपश्यना ध्यान परम्परा’ पर विशेष प्रकाश डाला।
कार्यक्रम संयोजक डॉक्टर राम किशोर ने बताया कि कुलपति की प्रेरणा से विश्वविद्यालय परिसर में योग की ओपीडी संचालित है, जिसमें साढ़े सात से 10 बजे तक विभिन्न प्रकार के रोगियों का उपचार योग की विधाओं से किया जाता है। यहां पर योग से बीएससी, एमएससी, एमए, और एक वर्ष का पीजी डिप्लोमा भी संचालित है।
इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय छात्र प्रमुख डॉ विकास सैनी, शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर श्रवण कुमार यादव, क्रीडा सचिव निमिषा सिंह कुशवाहा, डॉ राघवेंद्र चतुर्वेदी, शोध छात्र अनिल कुमार यादव, सूरज यादव, विशाल योग ओपीडी के अभ्यासी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।