जयपुर, 20 अक्टूबर । एसीबी मामलों की विशेष अदालत ने इंटर्नशिप एनओसी के नाम पर रिश्वत लेने से जुडे मामले में आरोपी योगेश कुमार, राजकुमार मीणा और रमेश कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में लोक कर्तव्यों का वास्तविक निर्वहन करने वाला व्यक्ति लोक सेवक की श्रेणी में आता है, उसका नियोक्ता सरकार हो गया अन्य कोई निजी संस्थान। अदालत ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के नियमों के अनुसार एनओसी जारी करने के एवज में कॉलेज द्वारा कोई शुल्क लिया जाना तय नहीं था।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक आलोक रवि ने बताया कि परिवादी रायसिंह गुर्जर ने गत 1 अक्टूबर को एसीबी में रिपोर्ट दी थी। जिसमें कहा गया कि उसकी भतीजी कल्पना गुर्जर किशनगढ़ रेनवाल आयुर्वेद कॉलेज से बीएएमएस की पढ़ाई कर रही है और वह अन्य कॉलेज से इंटर्नशिप करना चाहती है। इंटर्नशिप के लिए एनओसी प्राप्त करने हेतु जब 29 सितंबर को आवेदन किया गया, तो कार्यालय में मौजूद एलडीसी राजकुमार और डिप्टी डायरेक्टर योगेश ने 40 हजार रुपए जमा कराने को कहा। कॉलेज कैशियर रमेश शर्मा ने भी यही बात दोहराई और कहा कि यह राशि नकद ही देनी होगी। शिकायतकर्ता का कहना था कि इंटर्नशिप के लिए एनओसी जारी करने की कोई फीस नहीं लगती है। एसीबी ने ट्रेप कार्रवाई करते हुए कैशियर रमेश चंद शर्मा को परिवादी से 35,000 रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए दबोचा और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता ने कहा कि संस्था एक प्राइवेट कॉलेज है और उसे सरकार से कोई अनुदान नहीं मिलता है। इसके साथ ही आरोपी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोकसेवक की परिभाषा में नहीं आते हैं। कॉलेज के संघ विधान पत्र के तहत अन्य कॉलेज से इंटर्नशिप चाहने पर कॉलेज के विकास के लिए 40 हजार रुपए शुल्क लेने का प्रावधान है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।