कुरुक्षेत्र कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
कुरुक्षेत्र की जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। पंजाब के प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह हत्याकांड में तीन आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। इनमें चंडीगढ़ पुलिस का सिपाही भी शामिल है। कोर्ट ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला पुलिस कर्मी की मिलीभगत से हुई संवेदनशील हत्या का है। कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए यह निर्णय दिया है।
इस मामले में सिपाही मंजीत सिंह, प्रदीप उर्फ सनी और सुखपाल उर्फ राज को दोषी करार दिया गया है। तीनों निवासी खेड़ी राजो सिंह, जिला पटियाला के रहने वाले हैं। अदालत ने तीनों पर 18-18 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। यह सजा संदीप की हत्या के लिए दी गई है। यह मामला 2021 का है जब संदीप की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पीड़ित परिवार को लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला है।
प्रॉपर्टी डीलर की हत्या की पूरी कहानी
मृतक संदीप सिंह फिरोजपुर जिले के मानो चाहल गांव का रहने वाला था। वह अपने परिवार के साथ मोहाली के नयागांव में रहता था। गांव में उसकी खेती और आढ़त की दुकान थी। मोहाली में वह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम भी करता था। 21 जून 2021 को संदीप अपने दोस्त मंजीत सिंह से पेमेंट लेने की बात कहकर घर से निकला था। वह अपनी इनोवा कार, कपड़े और लाइसेंसी रिवाल्वर लेकर पटियाला पहुंचा था। उसी दिन उसने पत्नी को फोन कर होटल में रुकने की जानकारी दी थी।
अगले दिन भी दोनों के बीच बातचीत जारी रही। 23 जून को संदीप की पत्नी को उसकी आवाज घबराई हुई लगी। उसने बताया कि वह चंडीगढ़ के लिए निकल रहा है और दो घंटे में पहुंच जाएगा। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया। अगली सुबह तक वह घर नहीं पहुंचा। पत्नी ने मंजीत को फोन किया तो उसने संदीप से मिलने की बात झूठी कही। कुछ समय बाद संदीप का शव बोधनी गांव नहर के पास उसकी कार में मिला।
पुलिस जांच में खुलासा
पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए। मंजीत ने अपने साथियों के साथ मिलकर संदीप को देवीगढ़ में मिलने के बहाने बुलाया था। वहां उसे किराये के मकान में बंधक बना लिया गया। आरोपियों ने उसका फोन और रिवाल्वर अपने कब्जे में ले लिया। परिवार को गुमराह करने के लिए आरोपी दो दिनों तक पिहोवा इलाके में घूमते रहे। 23 जून की रात बोधनी नहर के पास संदीप को उसी की रिवाल्वर से गोली मारी गई। पोस्टमार्टम में घुटने, बाजू, सीने और सिर में गोली लगने की पुष्टि हुई। पत्नी की शिकायत पर केस दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार किया गया था।
हत्या की असली वजह 10 लाख रुपये का विवाद था। मंजीत चंडीगढ़ पुलिस में सिपाही था और उसका विभागीय रिकॉर्ड खराब था। उसके 18 इंक्रीमेंट रोक दिए गए थे। संदीप ने उससे कहा था कि उसकी ऊंची पहुंच है और वह रिकॉर्ड ठीक करा देगा। इसके बदले मंजीत ने उसे 10 लाख रुपये दिए थे। डेढ़ साल बाद भी रिकॉर्ड ठीक नहीं हुआ और पैसे वापस नहीं हुए। इसी विवाद में संदीप की जान ले ली गई। अब कोर्ट ने तीनों को दोषी करार देकर [उम्रकैद की सजा](https://hindi.news18.com/news/haryana/kurukshetra-court-punishes-three-convicts-in-murder-case-of-property-dealer-sandeep-singh-4932641.html) सुनाई है। इस फैसले से न्यायपालिका में लोगों का विश्वास बढ़ा है।
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