देवरिया, 05 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में सेना के जवान का पार्थिव शरीर लेकर देवरिया लौट रहे चार लोगों की मौत के बाद सोमवार को गहिला दुधैला गांव में मातम छा गया। हादसे में जवान का इकलौता बेटा गौरव सिंह (18), बड़ा भाई रामसमुझ (55), रिश्ते का भतीजा राजन सिंह (35) और एंबुलेंस चालक जसपाल सिंह की मौत हो गई।
सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे दो एंबुलेंस से सभी के पार्थिव शरीर गांव पहुंचे तो परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। हजारों की संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
गहिला दुधैला गांव निवासी सूबेदार मेजर सत्यवान सिंह की चंडीगढ़ स्थित सेना के कमांड अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के तीन दिन बाद मौत हो गई थी। इसके बाद पंचकूला से उनका पार्थिव शरीर एंबुलेंस से देवरिया लाया जा रहा था। एंबुलेंस में सत्यवान सिंह के परिवार के लोग भी सवार थे। रविवार सुबह करीब 8:15 बजे सुल्तानपुर जिले में अयोध्या बॉर्डर के पास पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर हलियापुर के निकट एंबुलेंस हादसे का शिकार हो गई।
टक्कर इतनी भीषण थी कि एंबुलेंस में सवार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने गौरव सिंह, रामसमुझ, राजन सिंह और चालक जसपाल को मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद सत्यवान सिंह का पार्थिव शरीर हलियापुर थाने में रखवाया गया, जबकि मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। देर शाम पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव देवरिया के लिए रवाना किए गए।
सोमवार सुबह जब शव गांव पहुंचा तो मातम छा गया। सेना के जवान सत्यवान सिंह की पत्नी सरोजनी देवी पति का पार्थिव शरीर देखकर फूट-फूटकर रोने लगीं। सत्यवान सिंह के पार्थिव शरीर के साथ उनके इकलौते बेटे और बड़े भाई का शव भी पहुंचा तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मृतक राजन सिंह वर्तमान में सभासद भी थे। उनका शव रुद्रपुर के भरटोली वार्ड स्थित घर ले जाया गया, जहां परिजनों के विलाप से माहौल गमगीन हो गया। अंतिम दर्शन के बाद सभी शवों को अंतिम संस्कार के लिए रुद्रपुर के बथुआ नदी किनारे स्थित बैकुण्ठ धाम ले जाया गया।
अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। इस दौरान भारत माता की जय और सत्यवान सिंह अमर रहे के नारे गूंजते रहे। बैकुण्ठ धाम पर चारों शवों के लिए अलग-अलग चिताएं तैयार की गईं। एक साथ चार लोगों की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
परिजनों के अनुसार, सभी लोग सत्यवान सिंह का पार्थिव शरीर पूरे सम्मान के साथ गांव लाकर अंतिम संस्कार कराने के लिए लौट रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि घर पहुंचने से पहले ही रास्ते में ऐसी त्रासदी उनका इंतजार कर रही है। परिवार के लोग जिस व्यक्ति को अंतिम विदाई देने के लिए लौट रहे थे, उसी के साथ उसका इकलौता बेटा, बड़ा भाई और रिश्तेदार भी दुनिया से विदा हो गए। कृषिमंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित क्षेत्रीय नेता पहुंचे । सेना के जवान की अंतिम विदाई में शामिल हुए ।
सूबेदार मेजर सत्यवान सिंह की पत्नी सरोजनी देवी ने जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी और पुलिस अधीक्षक अभिजित आर. शंकर को पत्र देकर मुख्यमंत्री से प्रत्येक आश्रित परिवार को पांच-पांच करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है। उन्होंने गांव में सत्यवान सिंह के नाम पर भव्य तोरण द्वार बनवाने, उनके नाम से पेट्रोल पंप आवंटित करने और परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की है। परिवार ने सरकार से इस दुख की घड़ी में हरसंभव मदद की गुहार लगाई है।