जानिए: फरीदकोट रेजिडेंट डॉक्टरों को राहत, सेवा जारी

फरीदकोट: मरीजों के हित में रेजिडेंट डॉक्टरों को सेवा जारी रखने का आदेश

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट ने बड़ा फैसला लिया है। यूनिवर्सिटी ने गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल सहित अपने अन्य संस्थानों में कार्यरत सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को अगले आदेश तक सेवा जारी रखने को कहा है। यह आदेश मरीजों की देखभाल और आपातकालीन सेवाओं की निरंतरता के लिए जारी किया गया है। यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार की ओर से जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह से अस्थायी है। इससे संबंधित डॉक्टरों को नियुक्ति की वैधता पुष्टि या नियमितीकरण का कोई दावा नहीं होगा। फिलहाल बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की समीक्षा प्रक्रिया भी जारी रहेगी।

पूर्व वीसी के कार्यकाल की नियुक्तियों का विवाद

यह पूरा मामला पूर्व वाइस चांसलर डॉ. राजीव सूद के कार्यकाल से जुड़ा है। उनके समय में हुई नियुक्तियों और पदोन्नतियों में नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली थीं। 11 अगस्त को हुई बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की बैठक में यह मुद्दा उठा था। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने करीब 180 नए भर्ती कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था, जिनमें कई डॉक्टर भी शामिल थे। साथ ही जनरल पूल में पदोन्नत करीब दो दर्जन डॉक्टरों को उनके मूल विभागों में वापस भेजा गया है। आरोप है कि कई भर्तियां बोर्ड की मंजूरी और बजटीय स्वीकृति के बिना की गई थीं। इस मामले ने यूनिवर्सिटी प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है।

सामूहिक निलंबन पर उठी आपत्तियां, सेवाएं हुई थीं प्रभावित

रेजिडेंट डॉक्टरों की सामूहिक बर्खास्तगी पर कई संस्थानों ने आपत्ति जताई थी। गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज के कई विभागों के अलावा एडवांस्ड कैंसर इंस्टीट्यूट बठिंडा, फाजिल्का और सिविल अस्पताल जलालाबाद ने भी चिंता जताई थी। डॉक्टरों के निलंबन से मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ने लगा था। अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने की खबरें आई थीं। इन आपत्तियों के बाद यूनिवर्सिटी ने अपना फैसला वापस लेते हुए रेजिडेंट डॉक्टरों को काम पर बने रहने के निर्देश दिए हैं। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मरीजों को राहत मिलेगी और इलाज की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रहेगी।

अस्थायी व्यवस्था, नियमितीकरण का नहीं दावा

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टरों की सेवा जारी रखना महज एक अस्थायी प्रबंध है। इसे नियुक्तियों की वैधता या पुष्टि का आधार नहीं माना जाएगा। आदेश में कहा गया है कि इससे किसी भी डॉक्टर को कोई अधिकार या समानता का दावा नहीं मिलेगा। बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की समीक्षा प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया की जांच पूरी होने तक यह व्यवस्था लागू रहेगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि आपातकालीन सेवाओं में कोई बाधा न आए। पंजाब के स्वास्थ्य क्षेत्र में यह मामला काफी चर्चा में बना हुआ है।

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी यूनिवर्सिटी प्रशासन के आधिकारिक बयान पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए यूनिवर्सिटी की [आधिकारिक वेबसाइट](https://bfuhs.ac.in/) और [पंजाब स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट](http://healthpunjab.gov.in/) देखी जा सकती है।)
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