ED के पूर्व अधिकारी निरंजन सिंह अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होंगे
एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) के पूर्व अधिकारी निरंजन सिंह बुधवार को पंजाब के खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होंगे। निरंजन सिंह ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मुझे रिटायर हुए 5-6 साल हो चुके हैं। सारी पार्टियां नशा खत्म करने की बात कह चुकी हैं। लेकिन पंजाब से नशा खत्म नहीं हुआ। पंजाब में बदलाव होना चाहिए।
निरंजन सिंह का ED करियर और ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग जांच
जानकारी के अनुसार, निरंजन सिंह ED में रहते हुए कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने ड्रग्स केस में शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से भी पूछताछ की थी। वह जालंधर में ED ऑफिस में लंबे समय तक तैनात रहे। यहीं से उन्होंने रिटायरमेंट ली। निरंजन सिंह ने पंजाब से जुड़े कई मनी लॉन्ड्रिंग और FEMA मामलों की जांच की। वह जगदीश सिंह भोला से जुड़े ड्रग-मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच से भी प्रमुख रूप से जुड़े रहे।
निरंजन सिंह का बयान: मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं था
निरंजन कुमार ने कहा कि मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं थी। 10 साल पहले अकालियों की सरकार रही। उस वक्त भी लोगों को कोई रिलीफ नहीं मिला। उनसे भी पंजाब नहीं संभला। कैप्टन की सरकार आई लेकिन वह भी माफिया की सरकार थी। उन्होंने ड्रग वाले लोगों को प्रोटेक्ट किया। उन्होंने कहा कि सभी सरकारें अपने वादे में फेल हुई हैं। सिर्फ नशा ही नहीं बल्कि करप्शन और लॉ एंड ऑर्डर का भी इश्यू है।
अमृतपाल के पिता ने घर जाकर की अपील
अमृतपाल पर लगे आरोपों को लेकर निरंजन सिंह ने कहा कि कानून अपना काम करेगा। कोर्ट फैसला करेगा। उन्होंने कहा कि सांसद अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह आज ही मेरे घर आए थे। उन्होंने मुझे अपने साथ आने की अपील की। चुनाव लड़ने पर निरंजन सिंह ने कहा कि अभी चुनाव लड़ने का मेरा कोई विचार नहीं है। अमृतपाल की कट्टरपंथी विचारों को लेकर उन्होंने कहा कि मैं कानून को मानने वाला हूं। पार्टी की विचारधारा भी कानून को मानने वाली है।
भोला ड्रग रैकेट मामले में निरंजन सिंह की भूमिका
जानकारी के अनुसार, निरंजन सिंह ने 2012 में ड्रग तस्कर राजा कंडोला के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद 2013 में उन्होंने अनूप काहलों से जुड़े ड्रग मामले की जांच संभाली। आगे की जांच में यह मामला करीब 6,000 करोड़ रुपए के भोला ड्रग रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में तब्दील हो गया। 2024 में इसी PMLA मामले की विशेष अदालत ने जगदीश सिंह भोला सहित 17 लोगों को दोषी ठहराया। निरंजन सिंह इस मामले में इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (IO) रहे।
निरंजन सिंह की जांच के दौरान 73 लोगों को चार्जशीट किया गया था। इनमें भोला के 11 परिवारजन भी शामिल थे। जांच के दौरान करीब 24 आरोपियों की 200 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां अटैच की गई थीं। 26 दिसंबर 2014 को ED ने तत्कालीन पंजाब राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से भोला ड्रग-मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में जालंधर ऑफिस में पूछताछ की थी। 2015 में निरंजन सिंह का कोलकाता ट्रांसफर विवाद भी सामने आया था। बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के दखल के बाद उनका ट्रांसफर रद्द कर दिया गया था। 31 मई 2021 को निरंजन सिंह डिप्टी डायरेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए।
पंजाब की राजनीति में निरंजन सिंह का अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होना एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे आने वाले चुनावी समीकरणों पर असर पड़ सकता है। देखना होगा कि ED के पूर्व अधिकारी का यह कदम पंजाब की राजनीति में क्या बदलाव लाता है। अधिक जानकारी के लिए India Today और NDTV पर विजिट करें।
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