गेहूं लिफ्टिंग धीमी, जाखड़ ने सरकार को घेरा

अबोहर में विधायक का औचक दौरा, मंडी की स्थिति देख भड़के

आज अबोहर में स्थानीय विधायक संदीप जाखड़ नए अनाज मंडी के औचक दौरे पर पहुंचे। इस दौरे में किसानों और आढ़तियों की समस्याएं सामने आईं। विधायक ने प्रदेश सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया। उनका कहना था कि मंडियों की यह दुर्दशा नीतिगत खामियों का परिणाम है। उन्होंने गेहूं की बोरियों के ढेर दिखाते हुए बताया कि खरीद सीजन अपनी चरम सीमा पर नहीं पहुंचा है। फिलहाल मंडी में केवल 40 प्रतिशत फसल ही आई है। लेकिन लिफ्टिंग की प्रक्रिया बहुत धीमी है। मंडी परिसर गेहूं की बोरियों से लबालब भरा है।

हालांकि, सरकार विज्ञापनों में सुचारू खरीद का दावा करती थी। अब नई फसल लाने वाले किसानों को ट्रॉलियां खड़ी करने में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। किसान अपनी फसल बेचने में काफी परेशानी झेल रहे हैं। इसी संदर्भ में जाखड़ ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आज सरकार एक बोरी उठाने के लिए ठेकेदारों के आगे बेबस है। उनके अनुसार, सरकार में न दूरदर्शिता है और न कोई ठोस नीति।

सुरक्षा चूक: बोरियों ने मंडी को ‘मौत का जाल’ बनाया

विधायक ने एक गंभीर सुरक्षा चूक की ओर ध्यान दिलाया। मंडी में बोरियों का अंबार इतना बड़ा है कि पैदल चलने की जगह नहीं बची। जाखड़ ने आक्रोश जताते हुए कहा, “अगर भीषण गर्मी और सूखी फसल में कहीं आग लग गई, तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी अंदर प्रवेश नहीं कर पाएगी।” रास्तों पर अवैध कब्जे और बोरियों की बेतरतीब स्टैकिंग ने मंडी को ‘मौत के जाल’ में तब्दील कर दिया है। करोड़ों की फसल और सैकड़ों किसानों की जान जोखिम में है। उन्होंने सवाल किया, “क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है?” लिफ्टिंग का प्रबंध न होना प्रशासन की मिलीभगत और सरकारी तंत्र की सुस्ती को दर्शाता है। अधिक जानकारी के लिए सरकारी विज्ञप्ति देखें।

किसानों की मेहनत पर पानी, भुगतान में देरी

सरकार की आलोचना करते हुए संदीप जाखड़ ने कहा कि किसान साल भर खून-पसीना बहाता है। लेकिन फसल बेचने के समय उसे मंडियों में धक्के खाने पड़ते हैं। लिफ्टिंग न होने के कारण भुगतान में देरी हो रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था का चक्र पूरी तरह डगमगा गया है। आढ़ती और मजदूर भी इस अव्यवस्था से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। सरकार ने बारदाना देने और समय पर फसल उठाने के जो वादे किए थे, वे केवल कागजी शेर साबित हुए। धरातल पर किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। सरकार केवल सोशल मीडिया और प्रचार तक सीमित है। किसानों की मुश्किलों पर अधिक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

24 घंटे की चेतावनी: नहीं सुधरा तो किसान उठाएंगे आवाज

विधायक ने अंत में सरकार को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग एसी कमरों से बाहर निकलें। वे मंडियों की धूल फांककर जमीनी हकीकत देखें। यह सरकार केवल सोशल मीडिया और प्रचार तक सीमित रह गई है। यदि अगले 24 घंटों में लिफ्टिंग तेज नहीं हुई और रास्ते साफ नहीं हुए, तो किसान चुप नहीं बैठेगा। सरकार की नाकामी के खिलाफ पुरजोर आवाज उठाई जाएगी। विधायक संदीप जाखड़ ने साफ किया कि वे किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। वे सरकार की तानाशाही और लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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