कोटकपूरा गोलीकांड : सुखबीर बादल समेत अन्य आरोपित चंडीगढ़ कोर्ट में पेश हुए

चंडीगढ़, 03 सितंबर । पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल कोटकपूरा गोलीकांड और बेअदबी से जुड़े अन्य मामलों में चंडीगढ़ की अदालत में पेश हुए। उनके साथ मामले के अन्य आरोपित भी अदालत पहुंचे। सुनवाई को देखते हुए अदालत परिसर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

सुनवाई के दौरान आरोपितों की ओर से पेश वकीलों ने अदालत से लंबित जांच की स्थिति स्पष्ट करने के लिए अभियोजन पक्ष को निर्देश देने का अनुरोध किया। बचाव पक्ष ने कहा कि पंजाब पुलिस की ओर से की जा रही जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस पर अदालत ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर सभी संबंधित मामलों में लंबित जांच की स्थिति स्पष्ट की जाए।

इससे पहले 10 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान पंजाब पुलिस ने सरकारी वकील के माध्यम से कोटकपूरा और बहबल कलां गोलीकांड मामलों में लंबित जांच से संबंधित स्थिति रिपोर्ट अदालत में सीलबंद लिफाफे में पेश की थी। बेअदबी से जुड़े कोटकपूरा के मामलों में गोलीकांड और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित मामलों की सुनवाई पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देश पर अप्रैल में चंडीगढ़ की सत्र अदालत में स्थानांतरित की गई थी।

कोटकपूरा गोलीकांड की घटना 14 अक्टूबर, 2015 को हुई थी। इससे पहले जून और सितंबर, 2015 में बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांवों के गुरुद्वारों में बेअदबी की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस की ओर से गोली चलाए जाने की घटना कोटकपूरा में हुई थी। इसी अवधि में बहबल कलां में भी गोलीबारी की घटना हुई थी, जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी। कोटकपूरा गोलीकांड में कई अन्य लोग घायल हुए थे।

मामले में पंजाब पुलिस के कई वरिष्ठ और पूर्व अधिकारियों को भी आरोपित बनाया गया है। इनमें पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, परमराज सिंह उमरानंगल, चरनजीत सिंह शर्मा, अमर सिंह चहल और सुखमिंदर सिंह मान हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल भी कोटकपूरा गोलीकांड मामले में आरोपित हैं।

अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने लंबित जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग दोहराई। वकीलों ने कहा कि मामलों की जांच को लेकर पंजाब पुलिस की वर्तमान स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ हो सके। अदालत ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई के दौरान सभी संबंधित मामलों में लंबित जांच की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए। इसके बाद अदालत आगे की कार्यवाही पर निर्णय लेगी।

सुनवाई के मद्देनजर अदालत परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। पुलिसकर्मियों की बड़ी संख्या में तैनाती के कारण अदालत परिसर में आने-जाने वालों पर भी निगरानी रखी गई।

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