लुधियाना: कोठी कब्जा आरोपी की जेल मौत, कोर्ट ने रोका पोस्टमार्टम, वारिस नहीं आए

लुधियाना जेल में विचाराधीन कैदी की मौत, पोस्टमार्टम पर 72 घंटे की रोक

पंजाब की लुधियाना सेंट्रल जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी (हवालाती) सुखविंदर सिंह की मौत हो गई है। जेल प्रशासन ने उसका शव सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में रखवा दिया है। इसकी सूचना इलाका मजिस्ट्रेट की कोर्ट को दे दी गई है। सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट ने पोस्टमार्टम की अनुमति मांगी थी। लेकिन इलाका मजिस्ट्रेट देर रात मॉर्चरी पहुंचे और पोस्टमार्टम पर रोक लगा दी।

परिजन नहीं पहुंचे, अदालत ने लिया ये फैसला

दरअसल, मृतक कैदी का कोई भी रिश्तेदार या परिवार का सदस्य सामने नहीं आया है। सुखविंदर की मौत 9 जून 2026 को हुई थी। जेल प्रशासन ने संबंधित थाने को सूचना दे दी थी। इसके बावजूद परिजन नहीं पहुंचे। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास करनबीर सिंह बत्रा ने शव के पोस्टमार्टम पर 72 घंटे की रोक लगा दी है। अदालत ने पुलिस और जेल प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान हर हाल में परिजनों की तलाश की जाए। परिजनों की मौजूदगी में ही आगे की कार्रवाई होगी।

कैसे बिगड़ी तबीयत, मृत घोषित किया गया

मृतक सुखविंदर सिंह मूल रूप से गुरदासपुर के बटाला के गांव किला लाल सिंह का रहने वाला था। वह पिछले साल मई 2025 से लुधियाना सेंट्रल जेल में बंद था। उस पर थाना डिवीजन नंबर 5 में एक आपराधिक मामला दर्ज था। 9 जून 2026 की सुबह करीब 6:35 बजे जेल के अंदर अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। बैरक में मौजूद अन्य बंदियों और जेल वार्डन ने तुरंत यह सूचना जेल के मेडिकल स्टाफ को दी। उसे तुरंत जेल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

प्रॉपर्टी विवाद में था आरोपी, हाईकोर्ट में भी लड़ी थी लड़ाई

सुखविंदर सिंह लुधियाना के एक चर्चित प्रॉपर्टी विवाद और हमले के मामले में सह-आरोपी था। यह विवाद अशोक नगर की एक बेशकीमती कोठी से जुड़ा था। इस संपत्ति के मालिक दिल्ली में रहने वाले सेवानिवृत्त मेजर सुरिंदरपाल सिंह गिल हैं। आरोपियों ने 26 अप्रैल 2025 की रात 10:15 बजे कोठी पर कब्जा करने की नीयत से धावा बोला था। उन्होंने केयरटेकर शंभू और उसके परिवार को बंधक बना लिया था और मारपीट की थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर सुखविंदर को 3 मई 2025 को गिरफ्तार किया था। उस पर BNS, 2023 की धारा 333, 191(3), 190, 351(2) और 324(4) के तहत केस दर्ज किया गया था। जेल में रहने के दौरान सुखविंदर ने जमानत के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन उसे वहां से भी राहत नहीं मिली थी। पंजाब समाचार के अनुसार, यह मामला काफी हाई-प्रोफाइल था।