पढ़ें: नवजोत कौर सिद्धू पंजाब प्रभारी से हटीं, सेहत का हवाला

BRP ने डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से किया मुक्त

भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी (BRP) ने बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को संगठन की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। वह पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी थीं। यह जानकारी गुरुवार, 15 अक्टूबर को ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी कर दी गई। पार्टी ने कहा कि खराब स्वास्थ्य के कारण यह फैसला लिया गया है।

सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल को मिली नई जिम्मेदारी

पार्टी ने डॉ. नवजोत कौर सिद्धू की जगह सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल को पंजाब प्रभारी बनाया है। BRP के बयान में साफ कहा गया कि यह बदलाव संगठनात्मक जरूरतों को देखते हुए किया गया। पार्टी ने डॉ. सिद्धू के योगदान की सराहना भी की। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी जल्द ही पंजाब में अपनी गतिविधियां तेज करेगी। [BRP का आधिकारिक ट्विटर हैंडल](https://twitter.com) पर भी यह जानकारी साझा की गई।

कांग्रेस छोड़कर BRP में शामिल हुई थीं नवजोत कौर

डॉ. नवजोत कौर ने पिछले साल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि सीएम की कुर्सी 500 करोड़ में बिकने वाली है। इस बयान से पंजाब की राजनीति में उथल-पुथल मच गई थी। कांग्रेस के स्थानीय नेता से लेकर हाईकमान तक विपक्ष के निशाने पर आ गए। पार्टी ने सख्त रवैया दिखाते हुए उन्हें शोकॉज नोटिस जारी किया। पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखाती, उससे पहले ही उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी।

मोदी सरकार की तारीफ से बढ़ी थी अटकलें

कांग्रेस छोड़ने के बाद नवजोत कौर ने मोदी सरकार की तारीफ करनी शुरू की। इससे कयास लगाए जा रहे थे कि वह भाजपा में शामिल होंगी। लेकिन उन्होंने अचानक BRP जॉइन कर लिया। पार्टी जॉइन करते समय उन्होंने कहा था कि वह पंजाब के विकास के लिए काम करेंगी। अब पार्टी ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर उन्हें जिम्मेदारियों से हटा दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले की कई तरह से चर्चा हो रही है। [पंजाब की ताजा राजनीतिक खबरों के लिए यहां क्लिक करें](https://news.google.com)।

आगे की रणनीति पर पार्टी का फोकस

BRP ने साफ किया है कि पार्टी पंजाब में मजबूती से आगे बढ़ेगी। नए प्रभारी सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल को जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा करने की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी का कहना है कि डॉ. सिद्धू के अनुभव का लाभ आगे भी मिलता रहेगा। फिलहाल, यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में क्या नए समीकरण बनते हैं।
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