जयपुर, 22 जून । राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने ऑपरेशन मदाविकाढ़त के तहत कार्रवाई करते हुए सात वर्ष से फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी मादक पदार्थ तस्कर रमेश बंजारा को मध्य प्रदेश के नीमच जिले से गिरफ्तार किया है। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे अभियान के तहत एएनटीएफ अब तक 66 फरार तस्करों को गिरफ्तार कर चुकी है।
एएनटीएफ पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि आरोपित रमेश बंजारा (35) निवासी जुना मालाहेड़ा, मनासा (नीमच) (मध्य प्रदेश) कंबल बेचने की आड़ में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु तक डोडा-चूरा तस्करी का नेटवर्क संचालित कर रहा था। दिन में वह कंबल बेचने का काम करता और रात में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में सक्रिय रहता था।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने भाई बहादुर की शक्ल-सूरत का फायदा उठाता था। कई बार पुलिस कार्रवाई के दौरान वह भाई का आधार कार्ड दिखाकर खुद को बहादुर बताकर बच निकलता था। फलोदी पुलिस द्वारा उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
एएनटीएफ ने आरोपित की गिरफ्तारी के लिए विशेष रणनीति बनाई। जांच के दौरान उसकी ससुराल गुंदा रेत गांव से जुड़े इनपुट मिले। दो टीमों ने सात दिन तक रिश्तेदारों और गतिविधियों पर नजर रखी। इसी दौरान सूचना मिली कि आरोपित पत्नी के साथ एक रिश्तेदार के मृत्युभोज में शामिल होने आने वाला है।
सामाजिक कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए टीम ने वहां कार्रवाई नहीं की। कार्यक्रम से लौटने के बाद जैसे ही आरोपित मध्य प्रदेश सीमा में मुख्य मार्ग पर पहुंचा, एएनटीएफ ने घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।
गिरफ्तारी के समय आरोपित खुद को बहादुर बताता रहा,जबकि उसके साथ मौजूद पत्नी भी उसे अपना जेठ बताकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास करती रही। हालांकि पूछताछ और परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर उसकी वास्तविक पहचान उजागर हो गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
आईजी विकास कुमार ने बताया कि ऑपरेशन का नाम तीन शब्दों से मिलकर बना है— मद (नशा), आविक (कंबल) और आढ़त (थोक व्यापार)। आरोपी कंबल बेचने की आड़ में नशे की थोक तस्करी करता था। इसलिए इस कार्रवाई को “ऑपरेशन मदाविकाढ़त” नाम दिया गया।