पटियाला सांसद का सिर प्रक्रिया पर बड़ा सवाल
पटियाला से सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने स्पेशल आइडेंटिफिकेशन एंड रेजिडेंस (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत उन्हें अपनी वोटर लिस्ट में वोट ही नहीं मिली। यह स्थिति तब है जब वह स्वयं सांसद हैं और चुनाव आयोग के लिए एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं। उनका कहना है कि सांसद होने के नाते उनका मामला वीआईपी कोटे से हल हो गया। हालांकि, उनके परिवार के सदस्यों को अपने प्रमाण पत्र जमा कराने के लिए डीसी कार्यालय तक जाना पड़ा। यह स्थिति आम नागरिकों के लिए कितनी कठिन होगी, इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है।
वोट मैपिंग में पांच सदस्यों को आई दिक्कत
डॉ. गांधी ने विस्तार से बताया कि उनके परिवार के पांच सदस्यों की वोट की मैपिंग नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2000 से इसी मोहल्ले के इसी घर में रह रहे हैं। उन्होंने तीन बार अलग-अलग स्थानों से चुनाव लड़ा है। हर बार उन्होंने इसी पते से अपना वोट डाला है। इसके बावजूद वोटों की मैपिंग सही से नहीं हो पा रही है। यह प्रश्न उठता है कि जब एक सांसद को इतनी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तो आम व्यक्ति की स्थिति क्या होगी। यह प्रक्रिया किसी के लिए भी सरल नहीं लग रही है।
आम लोगों की परेशानी पर सांसद की चिंता
सांसद ने कहा कि यह प्रक्रिया सरल होनी चाहिए थी और किसी को भी परेशानी में नहीं डालना चाहिए। उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की कि अगर उन्हें सांसद होने के बावजूद इतनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, तो आम लोगों को कितनी मुश्किलें झेलनी पड़ रही होंगी। उन्होंने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता और सहजता पर प्रश्नचिह्न लगाया है। यह मुद्दा लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ा है। वोट एक नागरिक का अधिकार है, जिसे बाधित नहीं होना चाहिए। सिर प्रक्रिया और वोटर लिस्ट की सटीकता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
चुनाव आयोग को सुधारने की आवश्यकता
डॉ. गांधी का यह बयान चुनाव आयोग को एक संकेत है कि सिर प्रक्रिया में व्यापक सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में तकनीकी खामियां हैं, जिन्हें ठीक करना अनिवार्य है। उनका मानना है कि इस तरह की गड़बड़ी से मतदाताओं का विश्वास कमजोर होता है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया है कि मैपिंग में सटीकता सुनिश्चित की जाए। नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं कटवाने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पात्र व्यक्तियों को बिना किसी बाधा के वोट डालने का अवसर मिलना चाहिए। यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे चुनावी तंत्र की पारदर्शिता से जुड़ा है।