जयपुर, 15 अक्टूबर । आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाने और पुलिसकर्मियों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए राजस्थान पुलिस ने नई पहल की है। इसके तहत पुलिसकर्मियों को संवेदनशीलता, प्रभावी संवाद और पारदर्शी कार्यप्रणाली का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गुरुवार को आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी परिसर में महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर तीन दिवसीय ‘पॉजिटिव बिहेवियर इन पुलिसिंग’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में 35 पुलिसकर्मी भाग ले रहे हैं और यह 17 अक्टूबर तक चलेगा।
डीजीपी शर्मा ने कहा कि राजस्थान पुलिस के आमजन के प्रति संवेदनशील व्यवहार और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चर्चा देशभर में होती है। इस सकारात्मक और पेशेवर छवि को बनाए रखना सभी पुलिसकर्मियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आमजन अपनी समस्याएं लेकर थाने पहुंचते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों को उनकी बात संवेदनशीलता से सुनकर विधिक प्रक्रिया के तहत राहत दिलाने का प्रयास करना चाहिए। संवेदनशीलता का अर्थ नरमी बरतना नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर पीड़ित की मदद करना है।
डीजीपी ने पुलिसकर्मियों से कहा कि वे शिकायतकर्ता की जगह खुद को रखकर सोचें कि थाने पहुंचने पर वे पुलिस से कैसा व्यवहार चाहते हैं। आमजन के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने थानों की कार्यप्रणाली को नए दृष्टिकोण से देखने, सकारात्मक माहौल बनाने और पुलिस के प्रति लोगों की धारणा बदलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लंबी ड्यूटी, त्वरित निर्णय और लगातार बदलती चुनौतियों के बीच स्पष्ट संवाद, सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार और कानून के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है।
पूर्व डीजीपी डॉ. एम.के. देवराजन ने कहा कि यह प्रशिक्षण केवल सीखने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का मंच भी है। प्रतिभागियों को अपने अनुभव खुलकर साझा करने चाहिए, क्योंकि सामूहिक चिंतन से ही सुधार के नए रास्ते निकलते हैं। कार्यक्रम में एचआरडी रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन अपूर्व कुमार ने स्वागत संबोधन दिया, जबकि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. पी.आर. सोढाणी ने आभार व्यक्त किया।
प्रशिक्षण में केस स्टडी, भूमिका-अभिनय, समूह चर्चा और आत्मचिंतन के माध्यम से पुलिसिंग को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने का प्रयास किया जा रहा है। शुक्रवार को दबावपूर्ण परिस्थितियों में पुलिसिंग, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक परिस्थितियों में संयम बनाए रखने और नाराज शिकायतकर्ताओं से संवाद करने पर चर्चा होगी। वहीं, शनिवार को प्रभावी संवाद, सक्रिय रूप से सुनने, आपसी संबंध मजबूत करने और नागरिकों के साथ विश्वासपूर्ण संबंध विकसित करने के व्यावहारिक उपायों पर काम किया जाएगा। समापन पर प्रतिभागियों की व्यक्तिगत और इकाई स्तर की कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी, ताकि प्रशिक्षण से मिली सीख को पुलिस की रोजमर्रा की कार्यशैली में लागू किया जा सके।