पंजाब कैबिनेट ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इसमें बठिंडा की जमीन घटाने, लाल-लकीर 30 दिन की अवधि तय करने और मनरेगा सत्र आयोजित करने की घोषणा शामिल है। केंद्रीय अधिकारियों और राज्य मंत्रियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि ये कदम किसानों और मजदूरों के हित में लिए गए हैं।
जमीन से संबंधित विवाद और कार्यवाही में तेजी लाने के लिए बठिंडा क्षेत्र की जमीन घटाई गई। सरकारी निर्देशानुसार लाल-लकीर की अवधि अब 30 दिन होगी। इससे जमीन विवाद और सर्वे कार्यों में सुविधा होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मनरेगा सत्र आयोजित किया जाएगा।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि इन फैसलों का सीधा लाभ किसानों और मजदूरों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश में किसानों के हित, भूमि विवाद का त्वरित समाधान और ग्रामीण रोजगार सुनिश्चित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बठिंडा में जमीन घटाने और लाल-लकीर की अवधि तय करने से भूमि विवाद कम होंगे और प्रशासनिक कार्यवाही तेज होगी। वहीं, मनरेगा सत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया कि इन निर्णयों के क्रियान्वयन पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही संबंधित विभागों के माध्यम से सभी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
यह कदम प्रदेश के किसान और मजदूर कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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