मोरिंडा में राजनीतिक नाटक, मंजीत कौर ने एक घंटे में बदली पार्टी
रोपड़ जिले के मोरिंडा शहर में एक अनोखी राजनीतिक घटना सामने आई है। आम आदमी पार्टी (AAP) की ब्लॉक प्रधान मंजीत कौर ने सिर्फ एक घंटे के भीतर दो विरोधी पार्टियों का साथ बदल दिया। पहले उन्होंने कांग्रेस जॉइन की, फिर तुरंत AAP में वापस लौट आईं। इस घटनाक्रम ने पूरे शहर में राजनीतिक हलचल मचा दी है।
मंजीत कौर सुबह पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के मोरिंडा स्थित निवास पर पहुंचीं। वहां बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता मौजूद थे। चन्नी ने मंजीत कौर को सिरोपा पहनाकर पार्टी में शामिल किया। इस मौके पर मंजीत कौर ने AAP सरकार पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया। चन्नी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें जारी कर इसे सत्ताधारी पार्टी से लोगों के मोहभंग का संकेत बताया।
चन्नी बोले- मंजीत पर कोई दबाव नहीं था
बाद में चन्नी ने स्पष्ट किया कि मंजीत कौर पर कोई दबाव नहीं था। उन्होंने अपनी मर्जी से पार्टी बदली थी। चन्नी के इस बयान ने मामले को और उलझा दिया। उन्होंने कहा कि AAP के कार्यकर्ता अब पार्टी से नाखुश हैं और यही कारण है कि वे कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं।
इस घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब मंजीत कौर अचानक AAP विधायक डॉ. चरणजीत सिंह के दफ्तर पहुंच गईं। विधायक ने उन्हें सिरोपा पहनाकर पार्टी में वापस शामिल किया। AAP कार्यालय में मंजीत कौर ने अपने सुर बदलते हुए कहा कि वह AAP की वफादार सिपाही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने उन्हें गुमराह कर बहकाया था।
विधायक ने चन्नी पर साधा निशाना
AAP विधायक डॉ. चरणजीत सिंह ने पूर्व सीएम चन्नी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चन्नी AAP कार्यकर्ताओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सभी कार्यकर्ता पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं। विधायक ने कहा कि मंजीत कौर की वापसी से साफ है कि AAP का कोई कार्यकर्ता पार्टी नहीं छोड़ना चाहता।
इस पूरे घटनाक्रम से मोरिंडा की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय लोग इस नाटक को लेकर हैरान हैं। कई लोग इसे राजनीतिक चालाकी का उदाहरण मान रहे हैं। वहीं, दैनिक जागरण के मुताबिक, विपक्षी पार्टियां इस मौके का फायदा उठाना चाहती हैं।
मंजीत कौर का यह राजनीतिक स्टंट आने वाले चुनावों के लिए बड़ा संकेत हो सकता है। दोनों पार्टियां अब अपने-अपने कार्यकर्ताओं को मजबूत करने में जुट गई हैं। इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि पंजाब की राजनीति में सब कुछ संभव है।
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