जहां राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता, मानवीय संवेदना और भाईचारा सर्वोच्च हों।
यह बात हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध
चिंतक प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कही। वे शुक्रवार को गुरु जम्भेश्वर विज्ञान
एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिविलाइजेशन स्टडीज ऑन माइग्रेशन
एंड डिस्प्लेसमेंट की ओर से विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस-2026 के उपलक्ष्य में आयोजित
कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
प्रो. अग्निहोत्री ने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपना घर, जमीन
और कारोबार छोड़कर अनजान परिस्थितियों में विस्थापित होना पड़ा। असंख्य लोगों ने अपनों
को खोया और अमानवीय परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के इतिहास
का अध्ययन तथ्यों और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उस दौर की
वास्तविक परिस्थितियों और मानवीय पीड़ा को समझ सके। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक
एकता अत्यंत प्राचीन और व्यापक है।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस अतीत
की पीड़ा को याद करने के साथ-साथ भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का भी अवसर है। विभाजन
ने केवल भूगोल को नहीं बांटा, बल्कि परिवारों, रिश्तों और सामाजिक संरचना पर भी गहरा
प्रभाव डाला। उन्होंने कहा कि इस दिन को किसी समुदाय के विरुद्ध भावना पैदा करने के
बजाय मानवता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के संकल्प के रूप में मनाया
जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी शक्ति
है।
डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि विभाजन के बाद भारत आए विस्थापित लोगों ने विपरीत
परिस्थितियों में अपने साहस, मेहनत और पुरुषार्थ से नए जीवन की नींव रखी। उन्होंने
कहा कि उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। विभाजन की त्रासदी
से हमें यह सीख लेनी चाहिए कि सामाजिक एकता, संवाद और भाईचारा ही किसी भी राष्ट्र की
सबसे बड़ी ताकत हैं।
इस अवसर पर विभाजन के प्रत्यक्षदर्शियों एवं पीड़ितों प्यारेलाल लाहोरिया,
चंद्रभान गांधी, गोपाल मनचंदा, वीरा देवी, जीवन देवी, गोविंद राम, खालिन्दा राम, कैलाश
कुमारी, ईश्वर देवी तथा जयरामदास चावला को सम्मानित किया गया। सम्मानित विभाजन पीड़ितों
ने अपने अनुभव और स्मृतियां साझा करते हुए उस दौर की पीड़ा, संघर्ष और विस्थापन की
मार्मिक कहानियां सुनाईं। उनकी आपबीती ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। सेंटर फॉर सिविलाइजेशन स्टडीज ऑन माइग्रेशन एंड डिस्प्लेसमेंट
के निदेशक डॉ. तेजपाल सिंह ने अतिथियों, विभाजन पीड़ितों और उपस्थित प्रतिभागियों का
आभार व्यक्त किया।