बरेली, 09 सितंबर । शेरगढ़ विकासखंड के गांव बैरमनगर में जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन ओवरहेड टैंक गिरने की घटना की वजह निर्माण में लापरवाही नहीं, बल्कि किच्छा नदी का तेज कटान और अत्यधिक जलप्रवाह बताया गया है। जल निगम (ग्रामीण) की ओर से तैयार की गई जांच रिपोर्ट में निर्माण सामग्री और गुणवत्ता में किसी तरह की कमी नहीं मिलने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक टैंक का निर्माण शुरू किए जाने के समय स्थल किच्छा नदी से करीब 150 मीटर दूर था। यह क्षेत्र फ्लड जोन में भी शामिल नहीं था। निर्माण से पहले मिट्टी का परीक्षण कराया गया था और स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन व निर्धारित मानकों के अनुसार ही काम कराया जा रहा था।
पिछले सप्ताह हुई अत्यधिक बारिश के बाद नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ गया। रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि गौला बैराज से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण भी नदी का बहाव बढ़ा। इसके बाद नदी की धारा में बदलाव आया और महज तीन से चार दिनों में तेज कटान करते हुए पानी टैंक परिसर के बिल्कुल किनारे तक पहुंच गया।
सैंड बैग और पिचिंग भी नहीं रोक सके कटान
जल निगम की ओर से टैंक को बचाने के लिए सैंड बैग लगाने के साथ पिचिंग की व्यवस्था की गई थी, लेकिन नदी का बहाव अत्यधिक तेज और गहरा होने के कारण कटान को तत्काल रोकना संभव नहीं हो सका। तेज कटान के चलते टैंक की करीब तीन मीटर गहरी नींव के आसपास की मिट्टी बह गई।
मिट्टी के खिसकने से नींव का धरातलीय सहारा कमजोर हो गया और टैंक एक तरफ झुकने लगा। इसके बाद आठ सितंबर को निर्माणाधीन टैंक अस्थिर होकर नदी में गिर गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माण के समय परिस्थितियां सामान्य थीं, लेकिन बाद में नदी की धारा और तटरेखा में असामान्य बदलाव आया। इसी प्राकृतिक परिस्थिति और तेज कटान को टैंक गिरने की प्रमुख वजह माना गया है।