अजमेर, 18 सितंबर । नाबालिग बच्चियों से जुड़े यौन अपराध के दो अलग-अलग मामलों में पोक्सो कोर्ट-1 ने शुक्रवार को दो दोषियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
विशिष्ट न्यायाधीश हेमंत सिंह की अदालत ने दोनों पर कुल 33 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। साथ ही पीड़िताओं को नियमानुसार प्रतिकर राशि दिलाने के निर्देश दिए।
पहले मामले में आरोपी ने घर से बाहर निकली नाबालिग का मुंह दबाकर उसे जबरन अपने मकान में ले जाकर दुष्कर्म किया था। दूसरे मामले में आरोपी ने आठ वर्षीय बच्ची को कुरकुरे का लालच देकर अपने साथ ले जाकर खेत में उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था। दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और गवाह पेश किए, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी माना।
पहला मामला दिसंबर 2024 में ग्रामीण थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था। अभियोजन के अनुसार बच्ची दिन में घर से बाहर निकली थी। इसी दौरान आरोपी ने उसका मुंह दबाकर उसे जबरन अपने मकान में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची रोते हुए घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी।उमामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 14 गवाह और 33 दस्तावेज पेश किए। पीड़िता और आरोपी की डीएनए रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत की गई। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।
दूसरे मामले में आठ वर्षीय बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान बाइक से आए आरोपी ने उससे पेट्रोल पंप का रास्ता पूछा। इसके बाद कुरकुरे दिलाने का लालच देकर बच्ची को अपने साथ ले गया। आरोप है कि वह उसे पेट्रोल पंप ले जाने के बजाय जंगल की ओर सरसों के खेत में ले गया और दुष्कर्म का प्रयास किया।
इसी दौरान खेत मालिक कुएं के पास लाइट देखने पहुंचा। बच्ची की चीख सुनकर वह मौके पर पहुंचा और आरोपी को पकड़ लिया। इस मामले में अभियोजन ने 12 गवाह और 21 दस्तावेज अदालत में पेश किए। अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 23 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत ने फैसले में कहा कि मासूम बच्चियों के साथ इस प्रकार के अपराध करने वाले आरोपियों के प्रति नरमी बरतना न्यायोचित नहीं होगा। ऐसे मामलों में नरमी से समाज में अपराधों के प्रति असंवेदनशीलता का गलत संदेश जा सकता है। अदालत ने पीड़िताओं की उम्र और मामलों की परिस्थितियों को देखते हुए कठोर दंड को उचित माना।
दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक प्रशान्त यादव ने पैरवी की।