एकात्म मानववाद है विकास का स्वदेशी दर्शन :डॉ एमपी सिंह

सुलतानपुर, 11 फ़रवरी । प्रख्यात विचारक डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि एकात्म मानववाद भारत के विकास का स्वदेशी और समग्र दर्शन है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के संतुलित विकास की बात करता है। एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह विचारधारा भारतीय संस्कृति और परंपरा पर आधारित है तथा आधुनिक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है।

डॉ. सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि एकात्म मानववाद केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व देता है। उन्होंने बताया कि इस दर्शन में व्यक्ति को समाज से अलग नहीं माना गया, बल्कि उसे व्यापक सामाजिक संरचना का अभिन्न अंग समझा गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज वैश्वीकरण के दौर में भारत को अपनी जड़ों से जुड़ी विकास अवधारणा अपनाने की आवश्यकता है। एकात्म मानववाद आत्मनिर्भरता, ग्राम विकास और संतुलित अर्थव्यवस्था पर बल देता है। कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों और छात्रों ने भी इस विषय पर अपने विचार रखे।

डॉ. एमपी सिंह ने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय चिंतन की मूल अवधारणाओं को समझें और उन्हें व्यवहार में लागू करें। उन्होंने कहा कि स्वदेशी सोच के साथ ही सतत और समावेशी विकास संभव है।

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं को सम्मानित किया गया और उपस्थित जनसमूह ने विचार-विमर्श में सक्रिय भागीदारी की।