सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से बढ़ रहा महिलाओं का आत्मविश्वास : विधानसभा अध्यक्ष

कानपुर, 04 जनवरी । राज्य विधानसभा अध्यक्ष ने कहा है कि सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल इतिहास को सहेजने का कार्य नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान को भी नई दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं पारंपरिक कला, शिल्प, लोकसंस्कृति और विरासत से जुड़ती हैं, तो उन्हें अपनी पहचान और क्षमताओं पर गर्व महसूस होता है।

विधानसभा अध्यक्ष एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहां महिला कारीगरों, लोक कलाकारों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि लोक कलाएं, हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधान, लोक संगीत और नृत्य न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं, बल्कि महिलाओं के लिए आजीविका के सशक्त माध्यम भी बन रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं से महिलाओं को प्रशिक्षण, बाजार और आर्थिक सहयोग मिल रहा है। इससे महिलाएं घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर समाज और अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत भूमिका निभा रही हैं। सांस्कृतिक धरोहरों से जुड़ाव ने महिलाओं में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और आत्मसम्मान को बढ़ाया है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूह पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक स्वरूप देकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा रहे हैं। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य हो रहा है।

उन्होंने समाज से आह्वान किया कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महिलाओं की भागीदारी को और प्रोत्साहित किया जाए। इससे महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा भी सुनिश्चित होगी। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस तरह की पहल से उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हुई है।