महिला आरक्षण बिल पर बोले पूर्व मंत्री कृपलानी, विपक्ष फैला रहा भ्रम

चित्तौड़गढ़, 21 अप्रैल । लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशाेधन बिल गिरने के बाद देश की राजनीति में इसे लेकर आरोप -प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी जहां इस मुद्दे को महिला आरक्षण से जोड़कर पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसके विरोध में खड़ा नजर आ रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में मंगलवार को चित्तौड़गढ़ स्थित भाजपा कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने मीडिया से विस्तार से बातचीत की।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कृपलानी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि लोकसभा सीटों में जनसंख्या के अनुपात के आधार पर वृद्धि की जाए और उसमें महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस बिल का विरोध कर देशभर की महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, जिससे महिलाओं में आक्रोश का माहौल बना हुआ है।कृपलानी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आज विपक्ष जातिगत आरक्षण के मुद्दे को लेकर भ्रम फैला रहा है, जबकि संविधान में इस प्रकार के प्रावधान को लेकर स्पष्ट नियम नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाना कि यह बिल पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों के चुनावों को ध्यान में रखकर लाया गया है, पूरी तरह निराधार है। उनके अनुसार इस विधेयक का चुनावों से कोई सीधा संबंध नहीं है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के बड़े संवैधानिक बदलाव को लागू करने में समय लगता है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कम से कम दो वर्षों का समय आवश्यक होगा। ऐसे में यह संभावना है कि यह व्यवस्था वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में लागू हो सके।

संसद में बिल गिरने को लेकर कृपलानी ने कहा कि वर्ष 1976 के बाद यह पहला अवसर है जब भाजपा लोकसभा में प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन विपक्ष ने इसे विफल कर दिया। उन्होंने एनडीए से अलग दलों पर भी तीखा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्ष को इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

पत्रकार वार्ता के दौरान जब कृपलानी से यह सवाल पूछा गया कि 16 अप्रैल को राष्ट्रपति द्वारा महिला आरक्षण विधेयक को अधिसूचित किया जा चुका है, तो फिर भाजपा इसे दोबारा क्यों प्रचारित कर रही है, इस पर उन्होंने कहा कि भाजपा लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर आरक्षण को अधिक प्रभावी रूप से लागू करने की पक्षधर है।

हालांकि, बातचीत के दौरान भाजपा के अंदर महिला नेतृत्व को लेकर उठे सवालों पर कृपलानी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। पार्टी में अब तक एक भी महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनने और पूर्व महिला मुख्यमंत्री को दरकिनार किए जाने जैसे मुद्दों पर उन्होंने कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित चर्चा में एक भी महिला पदाधिकारी की अनुपस्थिति ने भी कई सवाल खड़े कर दिए।