चंडीगढ़, 28 अक्टूबर । शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने बुधवार को नशे के पैसे से जुड़े मामले में मजीठिया के खिलाफ लगभग 40 हजार पन्नों का पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, जांच में करीब 736.96 करोड़ रुपये के कथित संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला है। जांच के दौरान 161 करोड़ रुपये की बेहिसाबी नकद जमा राशि, संदिग्ध विदेशी संस्थाओं के माध्यम से भेजे गए 141 करोड़ रुपये और कंपनियों के खातों में जमा 236 करोड़ रुपये की ऐसी राशि सामने आई है, जिसका स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। इससे पहले दाखिल किए गए आरोपपत्र में 540 करोड़ रुपये की संपत्तियों का उल्लेख किया गया था।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार सतर्कता ब्यूरो की जांच में मजीठिया से जुड़ी कंपनियों, शराब कारोबार से संबंधित वित्तीय लेनदेन और कथित अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करों के साथ संबंधों की पड़ताल की गई है। जांच के दौरान सराया इंडस्ट्रीज से जुड़े वित्तीय लेनदेन विशेष रूप से जांच के दायरे में रहे। इसके अलावा संदिग्ध विदेशी संस्थाओं, कारोबारी सहयोगियों और शराब कंपनियों के साथ हुए लेनदेन की भी जांच की गई। मामले के पुराने अभिलेखों में मजीठिया के सतप्रीत सिंह उर्फ सत्ता और परमिंदर सिंह उर्फ पिंडी के साथ कथित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। इन अभिलेखों में यह दावा भी किया गया था कि मजीठिया ने मंत्री रहते हुए उन्हें लाने-ले जाने के लिए अपने वाहन का इस्तेमाल किया था।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि जून, 2025 में पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने वर्ष 2021 में स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज प्राथमिकी से संबंधित जांच में नशे के पैसे के कथित शोधन का पता चलने की जानकारी दी थी। जांच में दावा किया गया कि मजीठिया के नियंत्रण वाली कंपनियों के खातों में बड़ी मात्रा में ऐसी रकम जमा की गई, जिसका संतोषजनक हिसाब उपलब्ध नहीं था।
इस मामले में सतर्कता ब्यूरो ने 30 नवंबर, 2025 को मजीठिया के करीबी सहयोगी बताए गए हरप्रीत सिंह गुलाटी को गिरफ्तार किया था। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार जांच के दौरान गुलाटी से संबंधित कंपनियों और मजीठिया से जुड़ी संस्थाओं के बीच धन के हस्तांतरण की जानकारी भी सामने आई थी। वर्ष 2025 की प्राथमिकी से संबंधित जांच में अतिरिक्त नकद जमा राशि, विदेशी संस्थाओं से प्राप्त कथित लाभ, कंपनियों के खातों में जमा अतिरिक्त रकम और अचल संपत्तियों में अस्पष्ट बढ़ोतरी जैसे पहलुओं की पड़ताल की गई है।