जयपुर, 30 जुलाई । राजस्थान हाईकोर्ट ने रामगढ बांध को पुनर्जीवित करने से जुडे मामले में राज्य सरकार को बांध के बहाव क्षेत्र में मौजूद सभी एनीकटों को हटाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि क्षेत्र में सबमर्सिबल पंप भी नहीं होने चाहिए। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश रामगढ बांध सहित प्रदेश के अन्य जल स्रोतों में अतिक्रमण से जुडे मामले में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर दिए।
अदालत ने कहा कि बांध और उसमें पानी लाने वाली नदियों को मूल स्वरूप में लाने का प्रयास किया जाए। वहीं अदालत ने राज्य सरकार से शपथ पत्र पेश कर बताने को कहा है कि बांध के कैचमेंट एरिया में किन लोगों ने अतिक्रमण किया है और इन्हें हटाने के लिए क्या किया गया। वहीं अदालत ने कैचमेंट एरिया की जमीन और यहां बने फार्म हाउस व होटलों का ब्यौरा भी मांगा है। खंडपीठ ने जयपुर व कोटपूतली कलेक्टर को 13 अगस्त को रिपोर्ट पेश कर बताने को कहा है कि रामगढ बांध में पानी लाने वाली नदियों में पानी क्यों नहीं आ पा रहा।
अदालती आदेश के पालन में जयपुर कलेक्टर वीसी के जरिए उपस्थित हुए। वहीं महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण के संबंध में आमेर एसडीओ का शपथ पत्र पेश किया और बताया कि कुल 625 रेफरेंस थे, जिनमें से 404 निस्तारित हो चुके हैं और बाकी के लंबित चल रहे हैं। जिन केसों का निस्तारण हो चुका है उनकी जमीन भी राज्य सरकार में दर्ज हो चुकी है। इसके अलावा बांध मामले में दो कमेटियां बनी हुई हैं। एक कमेटी की 14 व दूसरी की 17 मीटिंग हो चुकी हैं। जिस पर खंडपीठ ने एजी से कहा कि वे शपथ पत्र से संतुष्ठ नहीं हैं। ऐसे में आगामी सुनवाई पर राज्य सरकार एक विस्तृत शपथ पत्र पेश कर बताए कि कितने अतिक्रमण हटाए थे और वे किसके थे। इस दौरान न्याय मित्र डॉ. अभिनव शर्मा ने बताया कि रामगढ बांध में पानी लाने का मुख्य जरिया बाणगंगा नदी है, जो विराटनगर, शाहपुरा व अन्य जगहों से होती हुई बांध में पानी लाती है। इसके बहाव क्षेत्र में कई फार्म हाउस, रिसोर्ट व होटल बन गए हैं और बहाव क्षेत्र में बने एनीकटों के पीछे भी मिट्टी जमा हो गई है। जिससे पानी का बहाव क्षेत्र में फ्लो नहीं रहता।