जालंधर के जमशेर खास में प्रस्तावित बायोगैस संयंत्र को लेकर स्थानीय विरोध तेज हो गया है। किसान और निवासी इस परियोजना को आबादी वाले क्षेत्र के लिए खतरनाक बता रहे हैं। उनका मुख्य आरोप है कि यह प्लांट पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करेगा।
किसानों ने उठाए गेट और प्रदूषण के सवाल
किसान यूनियन सिद्धूपुर ने संयंत्र के दो गेटों के निर्माण पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि मंडी की तरफ बन रहा गेट गलत है। इससे मंडी के कामकाज पर बुरा असर पड़ेगा। किसानों को प्लांट से होने वाले वायु और जल प्रदूषण की भी चिंता है।
2 जनवरी को हाईवे जाम की चेतावनी
किसान नेता पहले 1 जनवरी को हाईवे जाम का आह्वान कर चुके हैं। संत रविदास जयंती और प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए इसे स्थगित किया गया था। अब उन्होंने 2 जनवरी को दोपहर 12 बजे हाईवे जाम करने की चेतावनी दी है। वे लवली यूनिवर्सिटी के पास परागपुर कट पर प्रदर्शन करेंगे। अपनी मांगें माने जाने तक वे हटने से इनकार करते हैं।
स्वच्छ भारत मिशन का हिस्सा है यह परियोजना
यह बायोफ्यूल प्रोजेक्ट जालंधर नगर निगम द्वारा पीपीपी मोड में लगाया जा रहा है। यह केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन का हिस्सा है। इसका उद्देश्य डेयरियों के गोबर से खाद और गैस बनाना है। परियोजना को वित्तीय वर्ष 2023-24 में मंजूरी मिली थी। तीन महीने से इसका निर्माण कार्य चल रहा है।
आबादी से दूर स्थानांतरण की मांग
जालंधर कैंट के एमएलए परगट सिंह ने संयंत्र के स्थान पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्लांट आबादी से महज 300 मीटर दूर है। गोबर की बदबू और ट्रैफिक का खतरा बढ़ेगा। उन्होंने इसे आबादी से दूर स्थानांतरित करने की सिफारिश की है। निगम के पास दूर की जमीन उपलब्ध है।
वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम बड़ी चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे संयंत्रों से अमोनिया और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी हानिकारक गैसें निकल सकती हैं। कचरे का अनुचित प्रबंधन भूजल को दूषित कर सकता है। भारी मशीनरी और गैस लीक का खतरा भी बना रहता है। इससे सांस की बीमारियां और मच्छरजनित रोग फैलने का डर है। पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को लेकर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
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