शिमला, 18 फ़रवरी । हिमाचल प्रदेश सरकार सेब बागवानों को भुगतान न मिलने की समस्या को रोकने के लिए व्यापारियों और आढ़तियों से ली जाने वाली बैंक गारंटी की शर्तों में बदलाव करने जा रही है। सरकार इस राशि को बढ़ाने की तैयारी में है ताकि सेब खरीदने के बाद कोई आढ़ती या लदानी भुगतान किए बिना फरार न हो सके। यह जानकारी कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विधायक कुलदीप सिंह राठौर के सवाल के जवाब में दी।
कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य की तीन कृषि उपज मंडी समितियों में सेब खरीद के बाद भुगतान न करने के कुल 379 मामले सामने आए हैं। इनमें शिमला-किन्नौर क्षेत्र में 144, सोलन में 191 और कुल्लू-लाहौल स्पीति में 44 शिकायतें शामिल हैं। इन मामलों में कुल 8.05 करोड़ रुपये की देनदारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि अब तक 69 मामलों में लगभग 1.93 करोड़ रुपये की राशि सेब उत्पादकों को दिलाई जा चुकी है, जबकि करीब 6.12 करोड़ रुपये का भुगतान अभी लंबित है।
कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों और बागवानों की शिकायतों को देखते हुए वर्ष 2019 में राज्य कृषि विपणन बोर्ड की बैठक में निर्णय लिया गया था कि अधिनियम की धारा 39 के तहत व्यापारियों के पंजीकरण के समय उनसे प्रतिभूति राशि ली जाएगी। इसके बावजूद कुछ मामलों में भुगतान में देरी या डिफॉल्ट की शिकायतें सामने आई हैं, इसलिए अब बैंक गारंटी की राशि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है ताकि बागवानों का पैसा सुरक्षित रह सके।
उन्होंने यह भी बताया कि कृषि उपज मंडी समिति सोलन में पिछले तीन वर्षों में 28 दोषी डिफॉल्टर आढ़तियों में से 12 ने किसानों और बागवानों का पैसा लौटा दिया है। वहीं 12 डिफॉल्टरों के खिलाफ मामले अदालत में विचाराधीन हैं और दो अन्य को रिकवरी नोटिस जारी किए गए हैं।
इससे पहले विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि हर साल छोटे बागवानों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है और अदालतों तथा नोटिस की प्रक्रिया में लंबा समय लगने से किसानों को और परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में कार्रवाई धीमी है और कुछ मंडियों में बागवानों की बड़ी राशि फंसी हुई है, इसलिए सरकार को इस दिशा में त्वरित कदम उठाने चाहिए और एपीएमसी व्यवस्था को और मजबूत करना चाहिए।