लुधियाना के जगराओं में नगर परिषद की पहली बैठक में विवादों का दौर
पंजाब के लुधियाना जिले के जगराओं नगर परिषद की पहली बैठक तीखे विवादों के बीच संपन्न हुई। कार्यकारी प्रधान कवरपाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने थे। बैठक में रखे गए 20 प्रस्तावों में से 16 पर सहमति बनी। लेकिन चार प्रमुख प्रस्तावों पर भारी विरोध हुआ। इससे बैठक का वातावरण तनावपूर्ण हो गया।
पहले ही प्रस्ताव पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
बैठक की शुरुआत दो मिनट के मौन से हुई। इसके बाद पहले ही प्रस्ताव पर कांग्रेस पार्षदों ने आपत्ति जताई। यह प्रस्ताव 30 जुलाई 2025 की एक रद्द बैठक को पुष्ट करने से जुड़ा था। कांग्रेस पार्षद रमेश कुमार मेषी सहोता और अमन कपूर ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उस बैठक में उनकी पार्टी का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। ऐसे में उसकी पुष्टि क्यों की जाए?
कुत्तों की नसबंदी और स्टेडियम के प्रस्तावों पर जोरदार विरोध
13वें प्रस्ताव पर माहौल और गरमा गया। यह प्रस्ताव कुत्तों की नसबंदी पर 9 लाख रुपये खर्च करने का था। पार्षद कविता कक्कड़ ने इसे पैसे की बर्बादी बताया। उन्होंने कहा कि पहले के प्रस्ताव भी लागू नहीं हुए। 20वें प्रस्ताव पर सबसे बड़ा टकराव हुआ। इसमें शहीद भगत सिंह कम्युनिटी हॉल को इनडोर स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव था। पार्षदों ने इसे गरीब विरोधी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह हॉल गरीबों के कार्यक्रमों का सहारा है। इसे स्टेडियम नहीं बनाया जाएगा।
शहर की समस्याओं और गैरहाजिरी पर उठे सवाल
पार्षद हिमांशू मलिक ने नगर परिषद पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूरा जगराओं अंधेरे में डूबा है। परिषद के पास एक बल्ब तक नहीं है। इस पर कार्यकारी प्रधान ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि जल्द ही सामान खरीदा जाएगा। कूड़े के मुद्दे पर भी एक महीने में समाधान का दावा किया गया। विपक्ष ने इसे खोखला आश्वासन कहा। पार्षदों ने पंजाब सरकार की सेहत योजना के कार्ड पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि कार्ड नगर परिषद से बनें। इससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
अहम बैठक में कई पार्षद रहे अनुपस्थित
इस अहम बैठक में कई पार्षद अनुपस्थित रहे। पूर्व प्रधान जतिंदरपाल राना भी नहीं आए। रविंदरपाल राजू, दर्शाना रानी और सुधा भारद्वाज भी गैरहाजिर रहे। रंजीत कौर विदेश में थीं। सदन में यह सवाल भी उठा। शहर के मुद्दों पर पहली बैठक में इतनी गैरहाजिरी चिंताजनक है। यह स्थानीय निकाय के कामकाज पर सवाल खड़े करती है।