धर्मशाला, 02 सितंबर । हिमाचल को ग्रीन हिमाचल बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार की इलेक्ट्रिक परिवहन पहल अब धरातल पर नजर आने लगी है। जिला कांगड़ा में वर्तमान में 45 इलेक्ट्रिक बसें विभिन्न रूटों पर यात्रियों को सेवाएं दे रही हैं। सीसीटीवी से लैस इलेक्ट्रिक बसें सुरक्षित, आरामदायक, पर्यावरण अनुकूल और कम शोर के साथ संचालित होती हैं। बस के दोनों दरवाजे पूरी तरह बंद होने के बाद ही इसका संचालन शुरू होता है। एचआरटीसी के मंडलीय प्रबंधक इंजीनियर पंकज चड्ढा ने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों से परिचालन खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आई है। जहां डीजल बसों के संचालन पर करीब 25-26 रुपये प्रति किलोमीटर खर्च आता है, वहीं इलेक्ट्रिक बसों का खर्च लगभग 11-12 रुपये प्रति किलोमीटर है।
6.35 करोड़ रुपये से ई-चार्जिंग स्टेशन
कांगड़ा जिले में धर्मशाला, नगरोटा बगवां, देहरा, पालमपुर,पठानकोट, बैजनाथ, जसूर और कांगड़ा में करीब 6.35 करोड़ रुपये की लागत से ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। वहीं जयसिंहपुर और शाहपुर में करीब 1.26 करोड़ रुपये की लागत से नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। फास्ट चार्जिंग सुविधा से बसों को कम समय में चार्ज कर विभिन्न रूटों पर संचालित किया जा रहा है।
रूट प्लानिंग और विशेष प्रशिक्षण
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए चालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। रूट प्लानिंग इस प्रकार की जा रही है कि एक बस करीब 170 से 250 किलोमीटर तक प्रभावी ढंग से संचालित हो सके। नए रूट शुरू करने से पहले सर्वेक्षण भी करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बसों के संचालन एवं रखरखाव के लिए संबंधित कंपनी के साथ 12 वर्ष का अनुबंध किया गया है, जिससे तकनीकी सेवाएं और रखरखाव लंबे समय तक सुनिश्चित रहेगा।
कम शोर, आरामदायक सफर और पर्यावरण अनुकूल परिवहन के कारण इलेक्ट्रिक बसों के प्रति यात्रियों का रुझान बढ़ रहा है। जिन रूटों पर ये बसें संचालित हो रही हैं, वहां सवारियों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अंतरराज्यीय रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन पर्यटकों के लिए भी सुविधाजनक साबित हो रहा है।
मंडलीय प्रबंधक धर्मशाला ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में हिमाचल को मॉडल स्टेट बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक परिवहन के विस्तार से प्रदेश में स्वच्छ, हरित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन को नई गति मिलेगी।