करनाल: IED आतंकी बेजमानत, रिंदा लिंक? जानें पूरा मामला

करनाल टोल प्लाजा मामला: आतंकी साजिश में शामिल आरोपी को जमानत नहीं

हरियाणा के करनाल जिले में मधुबन थाना क्षेत्र के बसताड़ा टोल प्लाजा पर इनोवा गाड़ी से तीन आईईडी, हथियार, कारतूस और नकदी के साथ पकड़े गए आरोपी परमिंदर सिंह उर्फ पिंदर को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। पंचकूला स्थित हरियाणा के विशेष एनआईए न्यायालय ने 31 अक्टूबर को उसकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच में जुटाए गए साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रथम दृष्टया आरोपी की कथित आतंकी गतिविधियों में भूमिका दर्शाते हैं। इसलिए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 43-डी (5) के तहत जमानत नहीं दी जा सकती।

5 मई 2022 को टोल प्लाजा पर हुई थी गिरफ्तारी

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 5 मई 2022 को सूचना मिलने पर मधुबन थाना पुलिस ने बसताड़ा टोल प्लाजा पर नाकाबंदी की थी। इस दौरान दिल्ली नंबर की सफेद इनोवा को रोककर तलाशी ली गई। गाड़ी से तीन आईईडी, दो मैगजीन, 31 जिंदा कारतूस, छह मोबाइल फोन और 1.30 लाख रुपए नकद बरामद हुए थे। पुलिस ने गाड़ी में सवार परमिंदर सिंह उर्फ पिंदर, गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी, अमनदीप सिंह उर्फ दीप और भूपिंदर सिंह को गिरफ्तार किया था। इस संबंध में मधुबन थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और 5, यूएपीए की धारा 13, 18 और 20 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 लगाई गई थी।

गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआईए ने संभाली जांच

केंद्रीय गृह मंत्रालय, नई दिल्ली के 24 मई 2022 के आदेश के बाद एनआईए ने इसी दिन मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच एजेंसी के अनुसार, पाकिस्तान में बैठा हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के नेटवर्क के जरिए भारत में आतंकी गतिविधियों की साजिश रच रहा था। आरोप है कि सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से विस्फोटक, हथियार और गोला-बारूद भेजे जाते थे। इनका इस्तेमाल आतंकी हमलों और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए होना था। एनआईए की जांच के मुताबिक, रिंदा ने गोपी को अपने नेटवर्क में शामिल किया था। इसके बाद गोपी ने मार्च 2022 में परमिंदर को जोड़ा। परमिंदर पर आगे भूपिंदर सिंह को भी नेटवर्क में भर्ती कराने का आरोप है। जांच में सितंबर 2021 से अप्रैल 2022 के बीच पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए पिस्तौल, हथगोले, आईईडी और नशीले पदार्थों की कई खेप मिलने की बात सामने आई।

बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के तर्क

परमिंदर की ओर से अधिवक्ता बृज भूषण ने कहा कि आरोपी 5 मई 2022 से जेल में है। जांच पूरी हो चुकी है और चालान भी पेश किया जा चुका है। कुल 164 गवाहों में से 72 महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही हो चुकी है। मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में अभी लंबा समय लग सकता है। इसलिए आरोपी को जेल में रखने का कोई लाभ नहीं है। बचाव पक्ष ने सह आरोपी सुखबीर सिंह उर्फ जशन को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से मिली जमानत का हवाला देकर समानता के आधार पर राहत मांगी। वहीं, एनआईए के विशेष लोक अभियोजक गगनदीप सिंह वासु ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को हथियारों और विस्फोटकों के साथ मौके पर पकड़ा गया था। उस पर आतंकी नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाने और अन्य आरोपियों की भर्ती करने के आरोप हैं। एजेंसी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ लुधियाना, जालंधर और फिरोजपुर में सात अन्य मामले दर्ज हैं।

अदालत ने सह आरोपी की जमानत का लाभ देने से किया इनकार

विशेष न्यायाधीश विजयंत सहगल ने सुप्रीम कोर्ट के एनआईए बनाम जाहूर अहमद शाह वटाली (2019) और गुरविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य (2024) के फैसलों का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि यूएपीए के मामलों में जमानत पर विचार करते समय आरोपों के प्रथम दृष्टया सही होने की स्थिति देखी जाती है। परमिंदर के खिलाफ साक्ष्य और गवाहों के बयान उसकी कथित भूमिका दर्शाते हैं। सुखबीर सिंह उर्फ जशन की भूमिका अलग होने के कारण उसे मिली जमानत का लाभ परमिंदर को नहीं दिया जा सकता। अदालत ने हिरासत अवधि और मुकदमे की स्थिति को देखते हुए भी जमानत का कोई असाधारण आधार नहीं पाया और याचिका खारिज कर दी। साथ ही स्पष्ट किया कि जमानत पर की गई टिप्पणियां मुकदमे के अंतिम फैसले को प्रभावित नहीं करेंगी। जमानत याचिका 19 अक्टूबर को पेश हुई थी और 31 अक्टूबर को इस पर फैसला सुनाया गया।

इस मामले से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए एनआईए की आधिकारिक वेबसाइट और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की वेबसाइट देखी जा सकती है।
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