नेपाली कांग्रेस महाधिवेशन में राष्ट्रीय मुद्दों पर सहमति का संदेश, पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर सहयोग पर जोर

काठमांडू, 05 अक्टूबर । नेपाल के प्रमुख राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने राष्ट्रीय मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष की सीमाओं से ऊपर उठकर सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है। नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र, संविधान, राष्ट्रीयता और आर्थिक रूपांतरण जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच संवाद और सहकार्य अपरिहार्य है।

नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने, नेपाली कांग्रेस के सभापति गगन थापा, नेकपा के संयोजक पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’, एमाले महासचिव शंकर पोखरेल, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबूराम भट्टराई, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन, श्रम संस्कृति पार्टी के महासचिव आरेन राई और जसपा नेपाल के नेता शरतसिंह भंडारी सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने राष्ट्रीय मुद्दों पर मिलकर काम करने पर जोर दिया।

रास्वपा को छोड़कर अधिकांश दलों के नेताओं ने मौजूदा व्यवस्था, संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीयता के सामने खतरे की ओर ध्यान दिलाया। वहीं रास्वपा ने कहा कि यदि लोकतंत्र पर खतरा आया तो जनता उसकी रक्षा करेगी।

नेपाली कांग्रेस सभापति गगन थापा ने कहा कि लोकतंत्र और जनता के दैनिक जीवन के बीच संबंध स्थापित करने की जिम्मेदारी कांग्रेस की है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक अधिकारों को नागरिकों के जीवन में महसूस होने वाली सेवाओं, अवसरों और आर्थिक विकास से नहीं जोड़ा गया तो लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर हो जाएगा। थापा ने कहा कि कांग्रेस को पुरानी और नई पीढ़ी के बीच तथा लोकतंत्र और डिलीवरी के बीच पुल का काम करना होगा।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस पुरानी और नई पीढ़ी के बीच पुल का काम करती है। लोकतंत्र और डिलीवरी के बीच भी कांग्रेस पुल का काम करेगी। पुल गिरा तो विश्वास भी गिर जाएगा।” रास्वपा सभापति रवि लामिछाने ने कहा कि देश से जुड़े सवालों के सामने राजनीतिक दल और झंडे का अंतर गौण हो जाता है। उन्होंने राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सभी राजनीतिक शक्तियों को एकजुट होने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा, “पार्टी की बात नहीं, जब देश और राष्ट्र की बात आती है, तब पार्टी और झंडा अलग नहीं होता।”

लामिछाने ने सरकार को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सरकार जनमत से बनी है और इसके गिरने की बात नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह सरकार नहीं गिरेगी, और जब सरकार नहीं गिरेगी तो सरकार गिरने की बात करने वाले ही बेहोश होकर गिरेंगे।” माओवादी नेता पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’ ने कांग्रेस के भीतर अभी भी अलग रहे नेताओं और समूहों को साथ लेकर आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को और अधिक एकजुट बनाकर आगे बढ़ाने की जरूरत है और नए नेतृत्व को सभी को समेटने का प्रयास करना चाहिए।

प्रचंड ने कहा कि शांति समझौते से जुड़े कुछ काम अभी भी पूरे होने बाकी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन कार्यों को पूरा नहीं किया गया तो देश फिर से संघर्ष की ओर जाने के जोखिम का सामना कर सकता है। उन्होंने कहा, “शांति समझौते की कुछ चीजें अभी पूरी होनी बाकी हैं। यह पूरा नहीं हुआ तो देश फिर किसी दूसरे संघर्ष में जा सकता है। इसे गगन थापा को भी पूरा करना होगा।”

एमाले महासचिव शंकर पोखरेल ने लोकतांत्रिक आंदोलन में वामपंथी और लोकतांत्रिक शक्तियों के साथ मिलकर संघर्ष करने के इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा कि एमाले अब भी कांग्रेस के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा और देश का स्वरूप बदलने के लिए दोनों दलों को फिर से मिलकर काम करना चाहिए।

पोखरेल ने कहा, “राणा शासन, पंचायती व्यवस्था और ज्ञानेन्द्र शाह के शासन के खिलाफ हमने मिलकर आंदोलन किया था। अब फिर मिलकर लोकतंत्र और देश का चेहरा बदलने का समय आया है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम करने को एमाले तैयार है।” हालांकि उन्होंने कांग्रेस के सामने सवाल भी रखा कि लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वाली कांग्रेस अब लोकतंत्र की रक्षा के लिए किस तरह आगे बढ़ती है।

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबूराम भट्टराई ने नेपाल के आधुनिक लोकतांत्रिक आंदोलन में नेपाली कांग्रेस की भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव के बावजूद देश की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। भट्टराई ने देश के विकास के लिए स्पष्ट और दीर्घकालीन योजना बनाने तथा उसके कार्यान्वयन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा की जरूरत बताई।

राप्रपा अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन ने दावा किया कि देश अपनी पटरी से उतर चुका है। उन्होंने कहा कि गलत चीजों की ओर ध्यान दिलाने पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है और सत्ता में सिर्फ चेहरे बदलने से राजनीतिक प्रवृत्ति नहीं बदलती। लिंगदेन ने कहा, “जब तक यह देश पटरी पर नहीं आता, मैं कहता रहूंगा। इन छह महीनों ने दिखा दिया है कि केवल लोगों को बदलने से समस्या का समाधान नहीं होता।”