पंजाब DA केस में हाईकोर्ट सख्त, सुप्रीम कोर्ट से स्टेटस रिपोर्ट मांगी; चीफ सेक्रेटरी फिर तलब

हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी से मांगी रिपोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी मुलाजिमों के बकाया DA मामले में चीफ सेक्रेटरी से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। सोमवार को हुई सुनवाई में चीफ सेक्रेटरी केएपी सिन्हा पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी याचिका में कुछ ऑब्जेक्शन थे। इन्हें दूर कर लिया गया है। हाईकोर्ट ने रिपोर्ट मांगने के साथ अगली सुनवाई की तारीख भी तय कर दी है। अगली सुनवाई में चीफ सेक्रेटरी को भी हाजिर रहना होगा।

सुप्रीम कोर्ट में अब तक सुनवाई शुरू नहीं

बता दें कि हाईकोर्ट ने सरकार को 15 दिन में बकाया DA देने के आदेश दिए थे। लेकिन पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। हालांकि वहां अभी तक सुनवाई शुरू नहीं हुई। हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई शुरू नहीं करा सकती तो वह इस केस की सुनवाई करेगा। इसके बाद पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को तलब कर लिया था। यह मामला सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बकाया DA को लेकर है।

DA विवाद की मुख्य बातें

पंजाब के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स DA/DR की लंबित किस्तों और एरियर की मांग कर रहे हैं। विवाद का आधार 6वें पंजाब पे कमीशन की सिफारिश है। इसमें DA को केंद्र सरकार के पैटर्न पर जारी रखने की बात कही गई थी। 3 अगस्त को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार और PSPCL की अपीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनर्स की सभी लंबित DA/DR किस्तें केंद्र के पैटर्न पर जारी की जाएं। कोर्ट ने 15 दिन में भुगतान का आदेश दिया था। देरी पर 6% सालाना साधारण ब्याज लगाने को कहा गया था।

सरकार और कर्मचारियों के तर्क

सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार ने कहा कि इतनी बड़ी राशि कम अवधि में जारी करना संभव नहीं है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि DA की दर तय करने का अधिकार राज्य के पास है। सरकार ने 1 सितंबर को SLP दाखिल की थी। रजिस्ट्री ने 9 तकनीकी आपत्तियां बताई थीं। 11 सितंबर को हाईकोर्ट ने आपत्तियां दूर करने के लिए 10 दिन का समय दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अभी हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि राज्य के टैक्स राजस्व में वृद्धि हुई है। करीब ₹14,200 करोड़ के बकाये का भुगतान किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि वेतन, पेंशन और कर्ज की अदायगी जैसी देनदारियां भी हैं। सरकार ने 50% DA देने का भरोसा दिया है। बकाया 8% DA जारी करने पर करीब 248 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई में चीफ सेक्रेटरी को व्यक्तिगत तौर पर पेश होना होगा। अधिक जानकारी के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की वेबसाइट देख सकते हैं।

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