जयपुर, 11 सितंबर । ऑनलाइन ट्रेडिंग में कम समय में भारी मुनाफे का झांसा देकर 3 करोड़ 81 लाख 37 हजार 677 रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एक आरोपित को उत्तर प्रदेश के फैजाबाद (अयोध्या) से गिरफ्तार किया है। केंद्रीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जयपुर की टीम ने आरोपित आलोक निवासी फैजाबाद को गिरफ्तार किया। पुलिस अब ठगी के पूरे नेटवर्क और रकम के मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि परिवादी ने 5 अक्टूबर 2025 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिवादी ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश की जानकारी गूगल पर तलाश रहा था। इसी दौरान उसे सीएमसी फॉरेक्स/सीएमसी ग्लोबल सीएस के नाम से ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की जानकारी मिली।
साइबर ठगों ने खुद को कंपनी के भारत स्थित कस्टमर केयर और मैनेजमेंट से जुड़ा बताते हुए टेलीग्राम के जरिए परिवादी से संपर्क किया। उसे कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा करवाई गई। शुरुआत में छोटी रकम पर रिटर्न देकर ठगों ने उसका विश्वास जीत लिया। इसके बाद परिवादी ने बड़ी रकम निवेश करना शुरू कर दिया और देखते ही देखते उससे कुल 3,81,37,677 रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।
जांच में सामने आया कि आरोपितों ने प्रतिष्ठित विदेशी ट्रेडिंग कंपनी सीएमसी का प्रतिरूपण कर उससे मिलती-जुलती वेबसाइट और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया था। टेलीग्राम के जरिए परिवादी को विभिन्न कंपनियों में निवेश के निर्देश दिए जाते रहे। फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट में निवेश की रकम के मुकाबले लगातार बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता था।
जब परिवादी ने रकम निकालने का प्रयास किया तो ठगों ने इनकम टैक्स, करेंसी एक्सचेंज फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट और मार्जिन गारंटी सहित अलग-अलग शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगनी शुरू कर दी। हर बार भुगतान के बाद नई शर्त या शुल्क बताकर फिर रकम जमा करवाई गई। इस तरह करोड़ों रुपये की ठगी कर ली गई, जबकि खाते में दिख रहा मुनाफा वास्तविक नहीं था।
पुलिस की जांच में एक लाभार्थी बैंक खाते का संबंध शिव बेकर्स एंड फास्ट फूड से सामने आया है। इस खाते में परिवादी से ठगी किए गए 20 लाख रुपये पहुंचे थे। बैंक रिकॉर्ड और मनी ट्रेल के आधार पर पुलिस अब यह पता लगा रही है कि ठगी की रकम आगे किन-किन खातों में पहुंचाई गई और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपित आलोक की पहचान हुई। अनुसंधान में उसकी भूमिका साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किए गए लाभार्थी बैंक खाते से जुड़ी सामने आई है। पुलिस के अनुसार आरोपू द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खाते और वित्तीय माध्यम का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने तथा आगे ट्रांसफर करने में किया गया।
मामले में सीडीआर, सीएएफ, आईपीडीआर और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। पुलिस ठगी की रकम की पूरी मनी ट्रेल खंगालने के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपितों की पहचान में जुटी है।
कार्रवाई उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन में केंद्रीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जयपुर के थानाधिकारी एवं उप अधीक्षक पुलिस गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने की। टीम में पुलिस निरीक्षक राधेश्याम, कांस्टेबल मनोज सामोता, कृष्ण यादव और कांस्टेबल चालक सुबे सिंह शामिल रहे।