सुप्रीम कोर्ट का पंजाब CM को झटका: आवारा कुत्तों पर बयान, हाईकोर्ट भेजा

### सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सीएम के कुत्तों वाले बयान पर याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कुत्तों को मारने के बयान को लेकर दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। याचिका में आरोप था कि सीएम ने कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से पेश किया। उन्होंने गुमराह करने वाली बात फैलाई कि कोर्ट ने कुत्तों को मारने की खुली छूट दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अगर मुख्यमंत्री कोई बयान देते हैं तो हम अपना आदेश नहीं बदलेंगे। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में जाने का निर्देश दिया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बैंच ने याचिकाकर्ता की बात सुनने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी हाईकोर्ट को दी गई है।

कोर्ट में क्या हुआ बहस

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों का मामला उठाया गया। वकील ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी कुत्तों को मारने की खुली छूट दे दी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “पंजाब हाईकोर्ट जाइए। मुख्यमंत्री के बयान से क्या हम अपना आदेश बदलेंगे?” कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि हाईकोर्ट को आदेश का सख्ती से पालन करना होगा। वकील ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया है। कोर्ट ने जवाब दिया, “ठीक है, अगला मामला। आप वहां जाकर याचिका दायर कर सकते हैं। हम आपकी बात पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।” इस तरह याचिका खारिज कर दी गई।

सीएम भगवंत मान का ट्वीट

सीएम भगवंत मान ने ट्वीट कर कहा था कि पंजाब सरकार 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कदम उठाए जाएंगे। इस ट्वीट के बाद विवाद खड़ा हो गया। सीएम ने कोर्ट के आदेश को लेकर गलतफहमी पैदा की। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश में कुत्तों को मारने की खुली छूट नहीं दी गई है। यह आदेश केवल खतरनाक या रेबीज से संक्रमित कुत्तों पर लागू होता है। सीएम का ट्वीट भ्रामक था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 8 अहम बातें

सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिन पहले आखिरी फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि खतरनाक या रेबीज से संक्रमित आवारा कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है। लोगों की जान की हिफाजत जरूरी है। गरिमा के साथ जीने में कुत्तों के खतरे से मुक्त रहने का अधिकार भी शामिल है। कोर्ट ने कहा कि संविधान ऐसे समाज की परिकल्पना नहीं करता, जहां बच्चे और बुजुर्ग अपनी शारीरिक ताकत या किस्मत के भरोसे जीएं। फैसले के साथ ही सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश के खिलाफ सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं। इस आदेश में 8 अहम बातें शामिल हैं, जिनमें नियमों का पालन अनिवार्य है।

आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है। अब याचिकाकर्ता पंजाब हाईकोर्ट में जाकर अपनी बात रख सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीएम के बयान को कोर्ट ने गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने कुत्तों को मारने की खुली छूट नहीं दी है। पंजाब सरकार को अब नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी। इस मामले में और जानकारी के लिए देखें LivеLaw की रिपोर्ट या BBC हिंदी का लेख। अदालत का कहना है कि आदेश का सख्ती से पालन होना चाहिए। इससे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
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