दो माह तक प्रदेशभर में चलेगा ‘जल-कृषि समृद्धि अभियान’,जल संरक्षण और कृषि विकास पर रहेगा जोर

देहरादून, 05 नवंबर । उत्तराखंड में जल संरक्षण, कृषि विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में जनभागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जलागम विभाग की ओर से आगामी दो माह तक प्रदेशव्यापी ‘जल-कृषि समृद्धि अभियान’ संचालित किया जाएगा। जलागम मंत्री राम सिंह कैड़ा ने बताया कि अभियान के माध्यम से जलागम विभाग की विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के साथ ही उनमें जनसहभागिता बढ़ाई जाएगी।

जलागम मंत्री ने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बीज वितरण, जरूरतमंद एवं निर्बल वर्ग के लाभार्थियों को सहायता उपलब्ध कराने, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ गोष्ठियां आयोजित करने तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, कृषि विकास और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना, ग्रीन एजी (जैफ-6) परियोजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जलागम घटक 2.0 तथा स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (सारा) की विभिन्न गतिविधियों को शामिल किया गया है। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि को जलवायु अनुकूल बनाने, जल संसाधनों के संरक्षण और आजीविका के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मंत्री ने बताया कि पिथौरागढ़ और हरिद्वार से अभियान का शुभारंभ किया जा चुका है। पिथौरागढ़ के यक्षवती नदी क्षेत्र में नदी उत्सव आयोजित किया गया। इसमें जनजागरूकता गतिविधियों, दीपदान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय लोगों को नदी एवं जलस्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

वहीं, हरिद्वार की पीली पड़ाव ग्राम पंचायत में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों को उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के तहत धान की सीधी बुवाई (डीएसआर), गोबर गैस संयंत्र और अन्य कृषि संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी गई। ग्रामीणों को इन योजनाओं से मिलने वाले लाभ और उनके उपयोग के बारे में भी बताया गया।

जलागम मंत्री ने कहा कि अभियान का उद्देश्य विभागीय योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने के साथ ही स्थानीय लोगों को जल और कृषि संसाधनों के संरक्षण से जोड़ना है। विभाग की ओर से अगले दो माह तक प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, ताकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि गतिविधियों को भी मजबूती मिल सके।