करनाल में 900 ग्राम वजन के साथ पैदा हुई बच्ची को गुरुग्राम में मिला जीवनदान

गुरुग्राम, 10 अक्टूबर । मात्र 900 ग्राम वजन के साथ पैदा हुई बच्ची को यहां चिकित्सकों ने कड़ी उपचार प्रक्रिया से जीवनदान दिया। मूलरूप से करनाल के रहने वाले दंपत्ति की इस बच्ची को सांस लेने में मदद के लिए मैकेनिकल वेंटिलेशन, फेफड़ों को विकसित करने के लिए सर्फेक्टेंट थेरेपी और ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ी। यह जानकारी पारस अस्पताल में नियोनेटोलॉजी विभाग के निदेशक डा. अमिताव सेन गुप्ता ने दी।

उन्होंने कहा कि समय से बहुत पहले जन्में बच्चों के कई ऑर्गन सिस्टम में जटिलताएं हो सकती हैं। क्योंकि उनके अंग अभी भी पूरी तरह से विकसित नहीं हुए होते हैं। इस बच्ची निक्की के केस में भी उसकी ग्रोथ और डेवलपमेंट में सहयोग करते हुए सांस लेने में गंभीर समस्या, इंफेक्शन, सर्कुलेटरी इनस्टेबिलिटी, कोएगुलेशन एब्नॉर्मलिटीज और पल्मोनरी हैमरेज का उपचार करना पड़ा। डा. अमिताव के अनुसार, हमारा फोकस ना केवल बच्चे को इस क्रिटिकल फेज से बचाना था, बल्कि उसके डेवलप हो रहे ब्रेन को सुरक्षित करना था। क्रिटिकल केयर के साथ-साथ पोषण का भी ध्यान रखा गया। करीब आठ सप्ताह की इंटेसिव नियोनेटल केयर के बाद निक्की को डिस्चार्ज करने का फैसला लिया गया।

निक्की के नीकू में रहने के दौरान ऑक्टोपस थेरेपी का भी इस्तेमाल किया गया। एक नरम सूरत से बने ऑक्टोपस को उसकी मां के पास रखने के बाद इनक्यूबेटर में उसके पास रखा गया, ताकि उसमें उसकी जानी-पहचानी खुशबू रहे। बच्ची के माता-पिता ने कहा कि बच्ची को जो देखभाल और ध्यान मिला, उससे उन्हें हिम्मत मिली। हर छोटा सा सुधार उन्हें बड़ी सफलता नजर आया। दो महीने बाद बेटी को घर लाना परिवार के लिए बहुत बड़ी खुशी का दिन रहा। उन्होंने डाक्टर्स की टीम का आभार जताया।