यूपी के हमीरपुर में रविवार से शुरू होगा मौन साधकों का 36 घंटे का अखंड व्रत

हमीरपुर, 07 नवंबर । उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में दीपावली पर्व बुंदेलखंड में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से जोड़कर मनाया जाता है। यहां पर मौन चराने की परंपरा सदियों से गांव-गांव में विद्यमान है। मौन साधक 36 घंटे का कठोर व्रत रखकर भगवान पर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। यह व्रत अमावस्या से शुरू होकर प्रतिपदा की शाम को समाप्त होता है। इस व्रत को करने वाले मौन साधकों को कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है।

बुंदेलखंड में दीपावली पर्व पर मौन चराने की परंपरा सदियों से विद्यमान है। मौन साधक अमावस्या को सुबह नदी सरोवर में जाकर स्नान करके मोर पंखों को धोते हैं। इसी के साथ 36 घंटे का व्रत शुरू होता है। प्रतिपदा को मौन साधक सुबह से गाय पूजन करके मौन रखकर गांव के सभी मठ मंदिरों में जाकर पूजन करते हैं। शाम को वापस लौटकर सामूहिक रूप से गाय का पूजन करके जयकारा लगाकर मौन व्रत समाप्त करते हैं। इसके बाद मां बहनें उन्हें मिष्ठान एवं शरबत पिलाकर व्रत का पारण कराती हैं। यह व्रत 14 वर्ष तक निरंतर रखा जाता है। 13 वर्ष तक गांव में इस परंपरा का निर्वहन करते हैं। 14वें वर्ष यह लोग वृंदावन जाते हैं।

वहां यमुना में स्नान के बाद गोवर्धन की परिक्रमा करके इस व्रत का समापन करते हैं। इन 14 वर्षों में मौन साधक स्नान के बाद ही नित्य शाकाहारी भोजन ग्रहण करता है एवं सात्विक जीवन व्यतीत करता है। आचार्य जुगल किशोर पाठक बताते हैं कि यह परंपरा बुंदेलखंड में सदियों से विद्यमान है। यह व्रत गांव-गांव में लोग करते हैं। इसमें सर्व समाज के लोग शामिल होते हैं। यह बहुत ही कठिन व्रत है और यह भगवान कृष्ण की भक्ति के लिए समर्पित होता है। इसमें गाय पूजन का बहुत बड़ा महत्व है। मौन साधक प्रतिपदा को गायों को चराने के लिए फसलें दान करते हैं। जिनको मौन चारागाह का नाम दिया जाता है।